विस्तृत उत्तर
इन उच्च-मुखी रुद्राक्षों (१५-२१ मुखी) का वर्णन मुख्य पुराणों में नहीं मिलता। इनका स्रोत रुद्रयामल तंत्र, मेरु तंत्र, विश्वकर्मा पुराण जैसी दुर्लभ पांडुलिपियां और तंत्र-ग्रंथ हैं। ये 'गुप्त एवं दुर्लभ प्रयोग' की श्रेणी में आते हैं।
१५ से २१ मुखी रुद्राक्षों का वर्णन रुद्रयामल और मेरु तंत्र जैसे दुर्लभ तंत्र-ग्रंथों में मिलता है।
इन उच्च-मुखी रुद्राक्षों (१५-२१ मुखी) का वर्णन मुख्य पुराणों में नहीं मिलता। इनका स्रोत रुद्रयामल तंत्र, मेरु तंत्र, विश्वकर्मा पुराण जैसी दुर्लभ पांडुलिपियां और तंत्र-ग्रंथ हैं। ये 'गुप्त एवं दुर्लभ प्रयोग' की श्रेणी में आते हैं।
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