विस्तृत उत्तर
कामदेव भस्म होने के बाद 'अनंग' नाम से जाने गये। 'अनंग' का अर्थ है — बिना अंग (शरीर) का।
शिवजी ने रति को वरदान देते हुए कहा — 'अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु। बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु॥'
इसका अर्थ — हे रति! अबसे तेरे स्वामीका नाम अनंग होगा। वह बिना ही शरीरके सबको व्यापेगा (अर्थात् काम-भावना सबके मन में बनी रहेगी, भले ही कामदेव का भौतिक शरीर न हो)।
इसीलिये कामदेव को 'अनंग' भी कहते हैं — वे अदृश्य रूप में सबके हृदय में काम-भावना जगाते रहते हैं।





