विस्तृत उत्तर
कामदेव के भस्म होते देखकर उनकी पत्नी रति अत्यंत व्याकुल हो उठीं। यह प्रसंग रति के अनन्य प्रेम और समर्पण का उदाहरण है।
रति का विलाप — रति अपने पति का हश्र देखकर विलाप करने लगीं। उन्होंने भगवान शिव से क्षमायाचना की और अपने पति को पुनर्जीवित करने की करुण प्रार्थना की। माता पार्वती ने भी रति के दुख को देखकर शिव से निवेदन किया।
रति की तपस्या — रति ने कठोर तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न किया।
शिव का वरदान — शिव ने जब सत्य जाना कि कामदेव निर्दोष था — उसने तो केवल पार्वती की सहायता की थी — तब उनका क्रोध शांत हुआ। पुराणों के अनुसार शिव ने रति की तपस्या और पार्वती के निवेदन से प्रसन्न होकर फाल्गुन पूर्णिमा को कामदेव को पुनर्जीवित होने का वरदान दिया। परंतु सशरीर जीवन नहीं मिला — वे 'अनंग' (शरीर-रहित) रूप में जीवित हुए। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनः जन्म लेने का वरदान भी मिला।





