विस्तृत उत्तर
वीरभद्र भगवान शिव के पहले उग्र अवतार और सबसे शक्तिशाली गण हैं। इन्हें 'रुद्रावतार' भी कहा जाता है।
उत्पत्ति — शिव पुराण के अनुसार, जब सती के आत्मदाह का समाचार शिव को मिला तो उन्होंने क्रोध में अपनी जटा का एक बाल उखाड़कर पर्वत-शिखर पर पटका। उस जटा से वीरभद्र की उत्पत्ति हुई। वीरभद्र के आठ भुजाएँ थीं, उनका रूप अत्यंत विकराल था, शरीर में नागराज लिपटे थे और वे शिव के समान ही वेश-भूषा धारण किए थे।
शिव-अंश और गण — वीरभद्र शिव से उत्पन्न होने के कारण शिव का अंश माने जाते हैं। शिव के गणों में भैरव के बाद नंदी और फिर वीरभद्र का स्थान है। वीरभद्र का विवाह देवी भद्रकाली से हुआ जिनकी पूजा मुख्यतः दक्षिण भारत में होती है।
वीरभद्र मंदिर — आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी गाँव में भव्य वीरभद्र मंदिर स्थित है जिसे 16वीं शताब्दी में विजयनगर के राजा ने बनवाया था।





