विस्तृत उत्तर
नंदी और भृंगी भगवान शिव के प्रमुख गण/सेवक हैं:
नंदी — शिव के वाहन और द्वारपाल
कथा: ऋषि शिलाद के पुत्र, शिव की कठोर तपस्या कर वाहन और द्वारपाल बने।
पूजा विधि
- 1शिव मंदिर में सबसे पहले नंदी के दर्शन करें।
- 2नंदी को स्पर्श कर प्रणाम करें।
- 3जल, अक्षत, फूल, चंदन अर्पित करें।
- 4नंदी की पीठ और सींगों पर चंदन/हल्दी लगाएं।
- 5'ॐ नंदीश्वराय नमः' मंत्र जपें।
- 6नंदी के कान में मनोकामना कहें (पहले 'ॐ' बोलें)।
- 7शिव पूजा से पहले नंदी पूजा — शिव पूजा के बाद भी नंदी को प्रणाम।
भृंगी — शिव के परम भक्त गण
कथा (शिव पुराण/स्कन्द पुराण)
भृंगी ऋषि शिव के अनन्य भक्त थे — वे केवल शिव की ही पूजा करते थे, पार्वती की नहीं। माता पार्वती ने क्रुद्ध होकर भृंगी को शाप दिया कि जो रक्त-मांस (मातृशक्ति) है वह शरीर से निकल जाए — भृंगी केवल हड्डियों का ढांचा (अस्थिपंजर) रह गए। शिव ने तीसरा पैर देकर भृंगी को खड़ा रहने योग्य बनाया। इसी कारण भृंगी तीन पैरों वाले दिखाए जाते हैं।
भृंगी पूजा
- 1भृंगी की अलग से पूजा बहुत प्रचलित नहीं — मुख्यतः शिव परिवार पूजा में इनका सम्मान।
- 2शिव मंदिरों में भृंगी की प्रतिमा (त्रिपाद) यदि हो तो प्रणाम करें।
- 3'ॐ भृंगिरीट्याय नमः' मंत्र।
- 4शिव के गणों (नंदी, भृंगी, वीरभद्र आदि) की सामूहिक पूजा — शिव पंचायतन पूजा में।
शिक्षा: भृंगी की कथा सिखाती है कि शिव और शक्ति अभिन्न हैं — केवल शिव या केवल शक्ति की पूजा अधूरी है। अर्धनारीश्वर तत्त्व — शिव-शक्ति एक हैं।
नंदी पूजा विशेष अवसर
- ▸प्रत्येक शिव दर्शन में।
- ▸सोमवार, शिवरात्रि, सावन।
- ▸बैल पोला (कृषक परंपरा)।





