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शिव पूजा विधि📜 शिव पुराण, धर्मशास्त्र, पूजा पद्धति2 मिनट पठन

शिवलिंग पर जनेऊ चढ़ाने का क्या अर्थ होता है?

संक्षिप्त उत्तर

जनेऊ चढ़ाना = शिव को वैदिक संस्कार से सम्मानित करना। तीन धागे = त्रिगुण (सत्त्व-रज-तम) / त्रिदेव / ब्रह्मसूत्र। बाएं कंधे से दाहिनी ओर चढ़ाएं। सफेद, नया जनेऊ ही अर्पित करें। विद्या प्राप्ति, संस्कार रक्षा, पितृ दोष निवारण।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग पर जनेऊ (यज्ञोपवीत/उपवीत) चढ़ाना शिव पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है:

अर्थ और प्रतीकात्मकता

1शिव को उपनयन संस्कार

जनेऊ उपनयन (द्विज) संस्कार का प्रतीक है। शिवलिंग पर जनेऊ चढ़ाना = शिव को वैदिक संस्कार के अनुसार सम्मानित करना। शिव स्वयं वेदों के स्वामी हैं।

2तीन गुणों का प्रतीक

जनेऊ के तीन धागे सत्त्व, रज और तम — तीन गुणों का प्रतीक हैं। शिवलिंग पर जनेऊ अर्पित करना = त्रिगुणातीत शिव को तीनों गुण समर्पित करना।

3त्रिदेव का प्रतीक

जनेऊ के तीन सूत्र ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) का प्रतीक भी हैं।

4ब्रह्मसूत्र

जनेऊ को 'ब्रह्मसूत्र' भी कहा जाता है — यह ब्रह्मज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।

विधि

  • शिवलिंग पर जनेऊ उसी प्रकार चढ़ाएं जैसे शरीर पर धारण करते हैं — बाएं कंधे से दाहिनी ओर।
  • पहले जलाभिषेक और चंदन तिलक लगाने के बाद जनेऊ अर्पित करें।
  • 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जपें।
  • सफेद, शुद्ध कपास का नया जनेऊ ही अर्पित करें — पुराना या प्रयुक्त नहीं।

लाभ

  • विद्या और ज्ञान प्राप्ति।
  • संस्कारों की रक्षा।
  • पूजा की पूर्णता — शिवलिंग पर जनेऊ और कलावा (मौली) दोनों अर्पित करने का विधान है।
  • पितृ दोष निवारण में सहायक।
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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, धर्मशास्त्र, पूजा पद्धति
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