विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार काशी में भगवान शिव के प्रमुख गणों ने अनेक जाग्रत शिवलिंग स्थापित किए। ये 'शिवगण-स्थापित लिंग' काशी के आध्यात्मिक रक्षा-तंत्र का अभिन्न अंग हैं। प्रमुख सूची इस प्रकार है —
दंडपाणि गण ने दंडीश्वर महादेव की स्थापना की — मुक्ति मंडप में स्थित।
घंटाकर्ण (घनकर्ण) गण ने घंटाकर्णेश्वर महादेव की स्थापना की — कर्णघंटा तालाब के समीप (K 60/66)।
वीरभद्र गण ने वीरभद्रेश्वर महादेव की स्थापना की — अविमुक्तेश्वर के पश्चिम में।
हुण्डन-मुण्डन गण ने हुण्डेश-मुण्डेश महादेव की स्थापना की — शैलेश्वर के निकट।
कुण्डोदर गण ने कुण्डोदरेश्वर महादेव की स्थापना की — लोलार्क कुंड के समीप।
महाकाल गण ने महाकालेश्वर महादेव की स्थापना की — महाकाल क्षेत्र में।
क्षेमक गण ने क्षेमेश्वर महादेव की स्थापना की — क्षेमेश्वर घाट क्षेत्र में।
पंचशीर्ष गण ने पंचशिखेश्वर महादेव की स्थापना की — वेताल कुंड के समीप।
इन सभी लिंगों में संबंधित गण की शक्ति स्थायी रूप से समाहित है।





