विस्तृत उत्तर
कालभैरव अष्टकम आदि शंकराचार्य द्वारा रचित भगवान कालभैरव (शिव का उग्र रूप) की स्तुति है। काशी (वाराणसी) के कालभैरव मंदिर से इसका विशेष संबंध है।
कब पाठ करें
- 1कालाष्टमी (प्रत्येक कृष्ण अष्टमी): काल भैरव का विशेष दिन।
- 2भैरवाष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी): वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण भैरव पर्व।
- 3शनिवार/मंगलवार: भैरव के विशेष दिन।
- 4रात्रि में: भैरव = रात्रि के देवता।
- 5भय/शत्रु समस्या में।
- 6काशी यात्रा: काशी में कालभैरव दर्शन पश्चात।
पाठ का उद्देश्य
- ▸भय निवारण (काल = मृत्यु, भैरव = मृत्यु भय नाशक)।
- ▸शत्रु नाश।
- ▸समय प्रबंधन (काल = समय — भैरव समय के अधिपति)।
- ▸काशी में मोक्ष प्राप्ति।
- ▸अनुशासन और संयम।
शंकराचार्य कृत — प्रत्येक श्लोक 'कालभैरवाष्टकं' में
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं...' — भैरव के चरण कमल देवराज इंद्र द्वारा सेवित।
बिना दीक्षा सभी पाठ कर सकते हैं — यह भक्ति स्तोत्र है।





