विस्तृत उत्तर
वज्र पंजर' का शाब्दिक अर्थ है हीरों (Diamonds) या वज्र का पिंजरा। सनातन धर्म के स्तोत्र साहित्य में 'वज्र पंजर कवच' एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा घेरा है जिसे कोई भी सांसारिक या तांत्रिक अस्त्र नहीं भेद सकता। शास्त्रों में मुख्य रूप से शनि वज्र पंजर कवच, दुर्गा वज्र पंजर कवच और लक्ष्मी-नारायण वज्र पंजर कवच का वर्णन मिलता है।
ब्रह्मांड पुराण में वर्णित 'श्री शनि वज्र पंजर कवच' (ॐ श्रीशनैश्चरः पातु भालं मे सूर्यनन्दनः...) अत्यंत प्रसिद्ध है। जब साधक इस कवच का पाठ करता है, तो वह विशिष्ट देवताओं का आवाहन करके अपने शरीर के प्रत्येक अंग (सिर, नेत्र, कंठ, हृदय आदि) को वज्र के समान अदृश्य पिंजरे में सुरक्षित कर लेता है। इसका नित्य पाठ करने वाले साधक पर शनि की साढ़ेसाती, दुर्घटना, शत्रु के काले जादू या अकाल मृत्यु का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।





