विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म के विभिन्न स्तोत्रों में 'कवच' (जैसे दुर्गा कवच, राम रक्षा कवच, नारायण कवच) का विशेष महत्व है। 'कवच' का शाब्दिक अर्थ है सुरक्षा का आवरण या ढाल।
जब साधक किसी कवच मंत्र का पाठ करता है, तो उसमें शरीर के प्रत्येक अंग (सिर से लेकर पैर तक) का नाम लेकर उस विशिष्ट देवता से उस अंग की रक्षा करने की प्रार्थना की जाती है (जैसे 'शिरो मे भालचन्द्रः पातु')। ध्वनि विज्ञान और संकल्प की शक्ति से यह पाठ साधक के भौतिक शरीर के चारों ओर स्थित 'आभामंडल' (Aura) को अत्यंत सघन और मजबूत बना देता है। यह एक अभेद्य ऊर्जा-घेरा (Energy Shield) बन जाता है, जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति, बुरी नजर, या तांत्रिक प्रयोग भेद नहीं सकता। यह साधक की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) और आत्मबल दोनों को बढ़ाता है।





