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विष्णु भक्ति📜 श्रीमद्भागवत पुराण (स्कंध 6, अध्याय 8)1 मिनट पठन

नारायण कवच का पाठ करने की विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

श्रीमद्भागवत (स्कंध 6, अध्याय 8): विश्वरूप→इंद्र। विष्णु के विभिन्न रूपों से प्रत्येक अंग/दिशा रक्षा। प्रातः, शुद्ध उच्चारण, एकादशी/गुरुवार। इंद्र ने इससे दैत्य जीते। बिना दीक्षा सभी पढ़ सकते।

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विस्तृत उत्तर

नारायण कवच श्रीमद्भागवत पुराण के छठे स्कंध, अध्याय 8 में वर्णित अत्यंत शक्तिशाली सुरक्षा स्तोत्र है। विश्वरूप ने इंद्र को दैत्यों से युद्ध हेतु यह कवच प्रदान किया।

पाठ विधि

  1. 1प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र।
  2. 2विष्णु/नारायण प्रतिमा सामने। तुलसी, दीपक।
  3. 3एकाग्रचित्त होकर पूर्ण पाठ।
  4. 4शुद्ध संस्कृत उच्चारण महत्वपूर्ण।
  5. 5एकादशी, गुरुवार विशेष।

विशेषता: इसमें विष्णु के विभिन्न रूपों (नरसिंह, वामन, वराह, परशुराम आदि) से शरीर के प्रत्येक अंग और दिशा की रक्षा मांगी गई है।

फल: सर्व शत्रु नाश, भय निवारण, दिव्य सुरक्षा, अदृश्य शक्तियों से रक्षा। भागवत: इंद्र ने इस कवच से दैत्यों पर विजय पाई।

बिना दीक्षा सभी पाठ कर सकते हैं — यह भक्ति स्तोत्र है।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीमद्भागवत पुराण (स्कंध 6, अध्याय 8)
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