विस्तृत उत्तर
नारायण कवच श्रीमद्भागवत पुराण के छठे स्कंध, अध्याय 8 में वर्णित अत्यंत शक्तिशाली सुरक्षा स्तोत्र है। विश्वरूप ने इंद्र को दैत्यों से युद्ध हेतु यह कवच प्रदान किया।
पाठ विधि
- 1प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र।
- 2विष्णु/नारायण प्रतिमा सामने। तुलसी, दीपक।
- 3एकाग्रचित्त होकर पूर्ण पाठ।
- 4शुद्ध संस्कृत उच्चारण महत्वपूर्ण।
- 5एकादशी, गुरुवार विशेष।
विशेषता: इसमें विष्णु के विभिन्न रूपों (नरसिंह, वामन, वराह, परशुराम आदि) से शरीर के प्रत्येक अंग और दिशा की रक्षा मांगी गई है।
फल: सर्व शत्रु नाश, भय निवारण, दिव्य सुरक्षा, अदृश्य शक्तियों से रक्षा। भागवत: इंद्र ने इस कवच से दैत्यों पर विजय पाई।
बिना दीक्षा सभी पाठ कर सकते हैं — यह भक्ति स्तोत्र है।





