विष्णु भक्तिनारायण कवच का पाठ करने की विधि क्या है?श्रीमद्भागवत (स्कंध 6, अध्याय 8): विश्वरूप→इंद्र। विष्णु के विभिन्न रूपों से प्रत्येक अंग/दिशा रक्षा। प्रातः, शुद्ध उच्चारण, एकादशी/गुरुवार। इंद्र ने इससे दैत्य जीते। बिना दीक्षा सभी पढ़ सकते।#नारायण कवच#श्रीमद्भागवत#सुरक्षा
शास्त्र ज्ञानदेवी भागवत और श्रीमद्भागवत में क्या अंतर है?देवी भागवत: देवी/शक्ति केंद्रित (शाक्त)। श्रीमद्भागवत: कृष्ण/विष्णु (वैष्णव)। दोनों: 12 स्कंध, ~18,000 श्लोक। भागवत = सर्वलोकप्रिय। देवी भागवत = शक्ति उपासना।: भागवत = महापुराण (बहुसंख्यक मत)।
श्रीमद्भागवतवेदव्यास ने भागवत किसे सुनाई?वेदव्यासजी ने श्रीमद्भागवत संहिता अपने निवृत्तिपरायण पुत्र शुकदेवजी को पढ़ाई।#वेदव्यास#शुकदेव#भागवत संहिता
श्रीमद्भागवतश्रीमद्भागवत की रचना कैसे हुई?व्यासजी ने भक्ति-योग से परमात्मा और उनकी माया को देखा, जीवों के अनर्थ का उपाय समझा और श्रीमद्भागवत की रचना की।#श्रीमद्भागवत#वेदव्यास#भक्ति योग
श्रीमद्भागवतश्रीमद्भागवत किसके लिए बनाई गई?वेदव्यास ने भगवत चरित्र से पूर्ण भागवत पुराण लोकों के परम कल्याण के लिए बनाया और शुकदेवजी को ग्रहण कराया।#श्रीमद्भागवत#वेदव्यास#लोक कल्याण
श्रीमद्भागवतश्रीमद्भागवत को परम धर्म क्यों कहा गया है?क्योंकि इसमें मोक्ष तक की फल-कामना से रहित, निष्कपट और सत्पुरुषों के योग्य परम धर्म का निरूपण है।#परम धर्म#श्रीमद्भागवत#निष्कपट धर्म
श्रीमद्भागवतश्रीमद्भागवत किसने रची?श्रीमद्भागवत को महामुनि व्यासदेव द्वारा निर्मित बताया गया है।#श्रीमद्भागवत#व्यासदेव#महापुराण
श्रीमद्भागवतश्रीमद्भागवत महापुराण क्या है?यह व्यासदेव रचित महापुराण है, जिसमें परम सत्य, निष्कपट परम धर्म, परमात्मा और भगवत रस का वर्णन है।#श्रीमद्भागवत#भागवत पुराण#परम धर्म
श्रीमद्भागवतदुख कैसे दूर करें?दुख दूर करने के लिये कृष्ण-स्मरण, भक्ति, श्रीमद्भागवत और सत्संग का मार्ग बताया गया है।#दुख#भक्ति#कृष्ण
श्रीमद्भागवतगीता पाठ से वैराग्य क्यों नहीं जागा?नारदजी ने गीता-पाठ किया, पर ज्ञान-वैराग्य पूरी तरह न जागे; सनकादि ने भागवत-कथा को फलरूप सार बताया।#गीता पाठ#वैराग्य#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवतवैराग्य कैसे लाएं?वैराग्य को बल देने वाला उपाय श्रीमद्भागवत का पारायण और भक्ति की स्थापना बताया गया है।#वैराग्य#ज्ञान#भक्ति
श्रीमद्भागवतकलियुग में क्या करें?कलियुग के लिये कृष्ण-स्मरण, भक्ति और श्रीमद्भागवत पारायण को मुख्य साधन बताया गया है।#कलियुग#भक्ति#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवतकलियुग में मन की शांति कैसे मिले?मन की शांति के लिये श्रीमद्भागवत श्रवण, भक्ति और केशव-कीर्तन का मार्ग दिखाया गया है।#मन की शांति#कलियुग#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवतजन्म-मृत्यु के भय से मुक्ति कैसे मिले?सूतजी श्रीमद्भागवत को संसार-भय और जन्म-मृत्यु के भय को दूर करने वाला साधन बताते हैं।#जन्म मृत्यु#मुक्ति#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवतक्या श्रीमद्भागवत सुनने से वैकुंठ मिलता है?श्रीमद्भागवत के पढ़ने-सुनने को शीघ्र वैकुंठफलदायक कहा गया है।#श्रीमद्भागवत#वैकुंठ#भागवत श्रवण
श्रीमद्भागवतभागवत कथा मन को कैसे शुद्ध करती है?सूतजी के अनुसार मन की शुद्धि के लिये श्रीमद्भागवत से श्रेष्ठ कोई साधन नहीं है।#मन की शुद्धि#भागवत कथा#भक्ति
श्रीमद्भागवतश्रीमद्भागवत सुनने से क्या फल मिलता है?स्रोत के अनुसार श्रीमद्भागवत सुनना मन को शुद्ध करता है, भय दूर करता है और वैकुंठफल देने वाला है।#श्रीमद्भागवत#भागवत श्रवण#वैकुंठ
श्रीमद्भागवतकलियुग में मोक्ष का सबसे आसान उपाय क्या है?कलियुग के लिये श्रीमद्भागवत का श्रवण और केशव-कीर्तन मोक्षदायक साधन बताए गए हैं।#कलियुग#मोक्ष#हरि कीर्तन
लोकश्रीमद्भागवत में हंस अवतारश्रीमद्भागवत में हंस अवतार सनकादिक मुनियों को आत्मज्ञान देने के लिए प्रकट होता है।#श्रीमद्भागवत#हंस अवतार#एकादश स्कंध
लोकहंस अवतार किस पुराण में हैहंस अवतार श्रीमद्भागवत एकादश स्कंध और महाभारत शांति पर्व में वर्णित है।#हंस अवतार पुराण#श्रीमद्भागवत#महाभारत शांति पर्व
लोकहंस अवतार कौन थेहंस अवतार भगवान विष्णु का ज्ञानमय रूप है, जिसने सनकादिक मुनियों को आत्मज्ञान दिया।#हंस अवतार#भगवान विष्णु#हंस गीता
लोकश्रीमद्भागवत नवम स्कंध अम्बरीष कथानवम स्कंध में अम्बरीष कथा भक्त-पराधीन भगवान की महिमा बताती है।#नवम स्कंध#अम्बरीष#श्रीमद्भागवत
लोकश्रीमद्भागवत अम्बरीष कथाश्रीमद्भागवत की अम्बरीष कथा भगवान की भक्त-पराधीनता बताती है।#श्रीमद्भागवत#अम्बरीष कथा#दुर्वासा
लोकराजा अम्बरीष कौन थेराजा अम्बरीष भगवान विष्णु के परम भक्त और महान चक्रवर्ती राजा थे।#राजा अम्बरीष#श्रीमद्भागवत#विष्णु भक्त
लोकभस्मासुर कथा के दो संस्करण क्यों मिलते हैं?दो संस्करण इसलिए मिलते हैं क्योंकि भागवत में ब्रह्मचारी रूप है, जबकि लोकपरंपरा में मोहिनी रूप अधिक प्रसिद्ध हुआ।#कथा संस्करण#श्रीमद्भागवत#शिव पुराण
लोकभस्मासुर कथा श्रीमद्भागवत में कहाँ आती है?भस्मासुर यानी वृकासुर की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कन्ध, अध्याय 88 में आती है।#श्रीमद्भागवत#दशम स्कन्ध#वृकासुर
लोकश्रीमद्भागवत में भस्मासुर को किस रूप से मारा गया?श्रीमद्भागवत में विष्णु जी ब्रह्मचारी रूप में वृकासुर को भ्रमित करते हैं, जिससे वह स्वयं भस्म हो जाता है।#श्रीमद्भागवत#वृकासुर#ब्रह्मचारी
लोकवृकासुर कौन था?वृकासुर शकुनि नामक असुर का पुत्र था, जिसने शिव जी से विनाशकारी वरदान मांगा और अपने ही वरदान से नष्ट हुआ।#वृकासुर#भस्मासुर#श्रीमद्भागवत
लोकसमुद्र मंथन किस पुराण में है?समुद्र मंथन श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण और महाभारत में वर्णित है।#समुद्र मंथन पुराण#श्रीमद्भागवत#विष्णु पुराण
लोकचतुःश्लोकी भागवत कहाँ मिलती है?यह श्रीमद्भागवत स्कंध २, अध्याय ९ में मिलती है।#चतुःश्लोकी#श्रीमद्भागवत#स्कंध 2
श्राद्ध दर्शनक्या श्राद्ध में पशु हिंसा कर सकते हैं?नहीं, श्राद्ध में पशु हिंसा पूर्णतः वर्जित है। भागवत पुराण श्राद्ध में पशु-हिंसा और मांसाहार का पूर्णतः निषेध करता है। पितर सात्त्विक हविष्यान्न अर्थात् दूध, घी, कंद-मूल से ही प्रसन्न होते हैं। पशुबलि या किसी जीव की हत्या से प्राप्त अन्न पितरों को कभी तृप्ति नहीं देता।#पशु हिंसा वर्जित#अहिंसा#श्रीमद्भागवत
ब्राह्मण भोजनदेव कार्य के लिए कितने ब्राह्मण होने चाहिए?श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार श्राद्ध में देव कार्य के लिए दो ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है। दो युग्म अर्थात् सम संख्या है, जबकि पितृ कार्य के लिए विषम संख्या एक, तीन, पाँच होती है। ब्राह्मण भगवान के भक्त, ज्ञाननिष्ठ और योगी होने चाहिए।#देव कार्य#दो ब्राह्मण#श्रीमद्भागवत
लोकश्रीमद्भागवत पुराण में महातल का क्या वर्णन है?श्रीमद्भागवत में महातल को काद्रवेय नागों का लोक बताया गया है, जहाँ तक्षक, कालिय, कुहक और सुषेण गरुड़ से भयभीत रहते हैं।#श्रीमद्भागवत#महातल#काद्रवेय
लोकश्रीमद्भागवत पुराण में रसातल का क्या वर्णन है?श्रीमद्भागवत में रसातल छठा अधोलोक है जहाँ पणि, निवातकवच, कालेय और हिरण्यपुरवासी असुर रहते हैं।#श्रीमद्भागवत#रसातल#पणि
लोकरसातल लोक की लंबाई और चौड़ाई कैसी है?रसातल की लंबाई और चौड़ाई पृथ्वी के समान बताई गई है।#रसातल लंबाई#रसातल चौड़ाई#भूमंडल
लोकवितल लोक विराट पुरुष के किस अंग में है?वितल लोक विराट पुरुष की ऊरुओं यानी जांघों में स्थित बताया गया है।#विराट पुरुष#वितल लोक#जांघ
लोकतलातल में प्रकाश कैसे होता है?तलातल में नागों की फण-मणियों से दिव्य प्रकाश होता है।#तलातल प्रकाश#नाग मणि#बिल-स्वर्ग
स्वाहास्वाहा देवी कौन हैं — उनकी उत्पत्ति कैसे हुई?श्रीमद्भागवत और शिव पुराण: आहुतियाँ देवताओं तक न पहुँचने से देवता क्षुधा-पीड़ित → ब्रह्मा जी के अनुनय पर मूल-प्रकृति के अंश से स्वाहा देवी प्रकट हुईं। स्वाहा = प्रजापति दक्ष की पुत्री, अग्निदेव की पत्नी। श्रीकृष्ण का वरदान: अग्नि की दाहिका शक्ति के रूप में देवताओं का पोषण।#स्वाहा देवी#दक्ष पुत्री#अग्निदेव पत्नी
भक्ति एवं आध्यात्मनाम संकीर्तन का आध्यात्मिक लाभ क्या हैनाम-संकीर्तन के लाभ — चित्त-शुद्धि, पाप-नाश, भक्ति-उदय और मोक्ष। भागवत 12.3.52 के अनुसार यह कलियुग में सतयुग के तप, त्रेता के यज्ञ और द्वापर की पूजा का फल देता है। देश-काल का कोई बंधन नहीं।#नाम संकीर्तन#आध्यात्मिक लाभ#कलियुग
भक्ति एवं आध्यात्मश्रवण कीर्तन स्मरण पादसेवन अर्चन वंदन दास्य सख्य आत्मनिवेदननवधा भक्ति के नौ अंग — श्रवण (कथा सुनना), कीर्तन (गान), स्मरण (स्मरण), पादसेवन (चरण-सेवा), अर्चन (पूजा), वंदन (नमस्कार), दास्य (सेवक-भाव), सख्य (मित्र-भाव), आत्मनिवेदन (पूर्ण समर्पण)। एक भी पूर्ण हो तो मोक्ष मिले।#नवधा भक्ति#श्रीमद्भागवत#श्रवण
भक्ति एवं आध्यात्मभक्ति के नौ प्रकार कौन से हैंनवधा भक्ति के नौ प्रकार हैं — श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन। यह श्रीमद्भागवत 7.5.23 में प्रह्लाद-वचन है। रामचरितमानस अरण्यकाण्ड में राम ने शबरी को अलग रूप में यही बताया।#नवधा भक्ति#भक्ति के नौ प्रकार#श्रीमद्भागवत