विष्णु भक्तिनारायण कवच का पाठ करने की विधि क्या है?श्रीमद्भागवत (स्कंध 6, अध्याय 8): विश्वरूप→इंद्र। विष्णु के विभिन्न रूपों से प्रत्येक अंग/दिशा रक्षा। प्रातः, शुद्ध उच्चारण, एकादशी/गुरुवार। इंद्र ने इससे दैत्य जीते। बिना दीक्षा सभी पढ़ सकते।#नारायण कवच#श्रीमद्भागवत#सुरक्षा
शास्त्र ज्ञानदेवी भागवत और श्रीमद्भागवत में क्या अंतर है?देवी भागवत: देवी/शक्ति केंद्रित (शाक्त)। श्रीमद्भागवत: कृष्ण/विष्णु (वैष्णव)। दोनों: 12 स्कंध, ~18,000 श्लोक। भागवत = सर्वलोकप्रिय। देवी भागवत = शक्ति उपासना।: भागवत = महापुराण (बहुसंख्यक मत)।
लोकसमुद्र मंथन किस पुराण में है?समुद्र मंथन श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण और महाभारत में वर्णित है।#समुद्र मंथन पुराण#श्रीमद्भागवत#विष्णु पुराण
लोकचतुःश्लोकी भागवत कहाँ मिलती है?यह श्रीमद्भागवत स्कंध २, अध्याय ९ में मिलती है।#चतुःश्लोकी#श्रीमद्भागवत#स्कंध 2
श्राद्ध दर्शनक्या श्राद्ध में पशु हिंसा कर सकते हैं?नहीं, श्राद्ध में पशु हिंसा पूर्णतः वर्जित है। भागवत पुराण श्राद्ध में पशु-हिंसा और मांसाहार का पूर्णतः निषेध करता है। पितर सात्त्विक हविष्यान्न अर्थात् दूध, घी, कंद-मूल से ही प्रसन्न होते हैं। पशुबलि या किसी जीव की हत्या से प्राप्त अन्न पितरों को कभी तृप्ति नहीं देता।#पशु हिंसा वर्जित#अहिंसा#श्रीमद्भागवत
ब्राह्मण भोजनदेव कार्य के लिए कितने ब्राह्मण होने चाहिए?श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार श्राद्ध में देव कार्य के लिए दो ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है। दो युग्म अर्थात् सम संख्या है, जबकि पितृ कार्य के लिए विषम संख्या एक, तीन, पाँच होती है। ब्राह्मण भगवान के भक्त, ज्ञाननिष्ठ और योगी होने चाहिए।#देव कार्य#दो ब्राह्मण#श्रीमद्भागवत
लोकश्रीमद्भागवत पुराण में महातल का क्या वर्णन है?श्रीमद्भागवत में महातल को काद्रवेय नागों का लोक बताया गया है, जहाँ तक्षक, कालिय, कुहक और सुषेण गरुड़ से भयभीत रहते हैं।#श्रीमद्भागवत#महातल#काद्रवेय
लोकश्रीमद्भागवत पुराण में रसातल का क्या वर्णन है?श्रीमद्भागवत में रसातल छठा अधोलोक है जहाँ पणि, निवातकवच, कालेय और हिरण्यपुरवासी असुर रहते हैं।#श्रीमद्भागवत#रसातल#पणि
लोकरसातल लोक की लंबाई और चौड़ाई कैसी है?रसातल की लंबाई और चौड़ाई पृथ्वी के समान बताई गई है।#रसातल लंबाई#रसातल चौड़ाई#भूमंडल
लोकवितल लोक विराट पुरुष के किस अंग में है?वितल लोक विराट पुरुष की ऊरुओं यानी जांघों में स्थित बताया गया है।#विराट पुरुष#वितल लोक#जांघ
लोकतलातल में प्रकाश कैसे होता है?तलातल में नागों की फण-मणियों से दिव्य प्रकाश होता है।#तलातल प्रकाश#नाग मणि#बिल-स्वर्ग
स्वाहास्वाहा देवी कौन हैं — उनकी उत्पत्ति कैसे हुई?श्रीमद्भागवत और शिव पुराण: आहुतियाँ देवताओं तक न पहुँचने से देवता क्षुधा-पीड़ित → ब्रह्मा जी के अनुनय पर मूल-प्रकृति के अंश से स्वाहा देवी प्रकट हुईं। स्वाहा = प्रजापति दक्ष की पुत्री, अग्निदेव की पत्नी। श्रीकृष्ण का वरदान: अग्नि की दाहिका शक्ति के रूप में देवताओं का पोषण।#स्वाहा देवी#दक्ष पुत्री#अग्निदेव पत्नी
भक्ति एवं आध्यात्मनाम संकीर्तन का आध्यात्मिक लाभ क्या हैनाम-संकीर्तन के लाभ — चित्त-शुद्धि, पाप-नाश, भक्ति-उदय और मोक्ष। भागवत 12.3.52 के अनुसार यह कलियुग में सतयुग के तप, त्रेता के यज्ञ और द्वापर की पूजा का फल देता है। देश-काल का कोई बंधन नहीं।#नाम संकीर्तन#आध्यात्मिक लाभ#कलियुग
भक्ति एवं आध्यात्मश्रवण कीर्तन स्मरण पादसेवन अर्चन वंदन दास्य सख्य आत्मनिवेदननवधा भक्ति के नौ अंग — श्रवण (कथा सुनना), कीर्तन (गान), स्मरण (स्मरण), पादसेवन (चरण-सेवा), अर्चन (पूजा), वंदन (नमस्कार), दास्य (सेवक-भाव), सख्य (मित्र-भाव), आत्मनिवेदन (पूर्ण समर्पण)। एक भी पूर्ण हो तो मोक्ष मिले।#नवधा भक्ति#श्रीमद्भागवत#श्रवण
भक्ति एवं आध्यात्मभक्ति के नौ प्रकार कौन से हैंनवधा भक्ति के नौ प्रकार हैं — श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन। यह श्रीमद्भागवत 7.5.23 में प्रह्लाद-वचन है। रामचरितमानस अरण्यकाण्ड में राम ने शबरी को अलग रूप में यही बताया।#नवधा भक्ति#भक्ति के नौ प्रकार#श्रीमद्भागवत