विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण में महातल को तलातल के नीचे स्थित काद्रवेय नागों का लोक बताया गया है। महातल में कद्रू के वंशज अनेक फनों वाले सर्प रहते हैं, जिन्हें क्रोधवश गण कहा गया है। इनमें कुहक, तक्षक, कालिय और सुषेण प्रमुख हैं। ये अत्यंत विशाल शरीर वाले, महान भोगों में लिप्त और शक्तिशाली हैं। फिर भी वे भगवान विष्णु के वाहन और पक्षियों के राजा गरुड़ से निरंतर भयभीत रहते हैं। वे पत्नी, संतान, मित्र और कुटुंब के साथ कभी-कभी प्रमत्त होकर विहार करते हैं।
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