विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत एवं शिव पुराण के अनुसार, सृष्टि के आरंभ काल में ब्राह्मणों द्वारा दी जाने वाली आहुतियां देवताओं तक नहीं पहुँच पा रही थीं, जिससे देवता क्षुधा-पीड़ित हो गए। तब ब्रह्मा जी के अनुनय पर मूल-प्रकृति के अंश से 'स्वाहा' देवी का प्राकट्य हुआ। स्वाहा प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं और उनका विवाह साक्षात् अग्निदेव के साथ संपन्न हुआ।
भगवान श्रीकृष्ण ने स्वाहा देवी को यह वरदान दिया कि अग्निदेव की दाहिका (जलाने वाली) शक्ति के रूप में वे ही यज्ञ-भाग को ग्रहण कर देवताओं का पोषण करेंगी।





