विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में श्रीमद्भागवत सुनने का फल बहुत ऊंचा बताया गया है। सूतजी कहते हैं कि यह शास्त्र कलियुग में जीवों के संसार-भय को दूर करने के लिये कहा गया है। यह भक्ति को बढ़ाता है, भगवान श्रीकृष्ण को संतुष्ट करता है और मन की शुद्धि के लिये श्रेष्ठ साधन है। वे यह भी कहते हैं कि जब मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पुण्य का उदय होता है, तभी उसे भागवत की प्राप्ति होती है। आगे ब्रह्माजी के सत्यलोक में साधनों को तौलने का प्रसंग आता है। उस तुलना में अन्य साधन हलके पड़ते हैं और भागवत अपने महत्व के कारण श्रेष्ठ सिद्ध होती है। इसी इसे कलियुग में पढ़ने-सुनने से शीघ्र वैकुंठफल देने वाला कहा गया है। सप्ताह-विधि से भागवत सुनने को भी मुक्ति देने वाला बताया गया है। इसलिए स्रोत के अनुसार श्रीमद्भागवत सुनने से मन-शुद्धि, भक्ति-वृद्धि, संसार-भय का नाश और वैकुंठफल मिलता है।
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