विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह की मृत्यु कृष्ण-स्मरण और योगपूर्ण प्राणत्याग के रूप में हुई। वे शरशय्या पर पड़े हुए धर्म का उपदेश कर रहे थे। उसी समय उत्तरायण आया, जिसे भगवत्परायण और मृत्यु को अपने अधीन रखने वाले योगी चाहते हैं। भीष्म ने वाणी रोक दी, मन को सब ओर से हटाकर सामने खड़े श्रीकृष्ण में लगा दिया और कृष्ण के चतुर्भुज रूप पर दृष्टि स्थिर कर दी। कृष्ण-दर्शन से शस्त्रों की पीड़ा दूर हो गई और कृष्ण की विशुद्ध धारणा से उनका अशुभ नष्ट हो गया। शरीर छोड़ते समय उन्होंने इंद्रियों की वृत्तियाँ रोककर कृष्ण की स्तुति की। अंत में मन, वाणी और दृष्टि से अपने को कृष्ण में लीन किया और उनके प्राण शांत हो गए।
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