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उत्तरायण प्रश्नोत्तरी — 11 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तरायण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 11 प्रश्न

महाभारत

भीष्म पितामह की मृत्यु क्यों नहीं हुई बाणों पर?

भीष्म पितामह को उनके पिता शांतनु से इच्छामृत्यु का वरदान था इसलिए बाणों की शैया पर 58 दिन पड़े रहने पर भी वे जीवित रहे। वे उत्तरायण की प्रतीक्षा में थे क्योंकि शास्त्रों में उत्तरायण में मृत्यु को मोक्षदायी माना जाता है। मकर संक्रांति पर उन्होंने स्वेच्छा से प्राण त्यागे।

भीष्म पितामहइच्छामृत्युबाणों की शैया
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह की मृत्यु कैसे हुई?

भीष्म पितामह ने उत्तरायण में वाणी रोककर मन कृष्ण में लगाया, कृष्ण की स्तुति की और उनके प्राण कृष्ण में लीन हो गए।

भीष्म मृत्युउत्तरायणकृष्ण ध्यान
देव काल

उत्तरायण देवताओं का दिन क्यों कहा गया है?

सूर्य का उत्तर की ओर संक्रमण देवताओं का दिवस कहा गया है।

उत्तरायणदेवताओं का दिनसूर्य संक्रमण
लोक

देवयान मार्ग में कौन-कौन से लोक पड़ते हैं?

देवयान मार्ग में — अर्चिस, दिन, शुक्ल पक्ष, उत्तरायण, देवलोक, वायु, वरुण, इंद्र, प्रजापति, सूर्य, विद्युत — और फिर अमानव पुरुष सत्यलोक ले जाता है।

देवयानलोकअर्चिस
तर्पण

मकर संक्रांति पर पितरों का तर्पण क्यों करते हैं?

दक्षिणायन = पितृयान, उत्तरायण = देवयान। मकर संक्रांति = दक्षिणायन की समाप्ति + पितरों की विदाई का दिन → तर्पण अनिवार्य। विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण: इस दिन पितर श्राद्ध-तर्पण करने वाला अनंत फल का भागी।

पितर तर्पणउत्तरायणपितृयान देवयान
मकर संक्रांति परिचय

उत्तरायण क्या होता है — देवयान क्यों कहते हैं?

उत्तरायण = 'देवयान' — अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर। दक्षिणायन = 'पितृयान'। मकर संक्रांति = उत्तरायण का प्रथम दिन — पितरों की विदाई और देवताओं के स्वागत का पर्व।

उत्तरायणदेवयानदक्षिणायन
मकर संक्रांति परिचय

मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं?

मकर संक्रांति = सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण। उत्तरायण = 'देवयान' — अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता की ओर। धर्मसिंधु, मत्स्य पुराण आदि: इस दिन स्नान, दान, जप और तप का फल अनंत कोटि गुणा।

मकर संक्रांतिसूर्य संक्रमणउत्तरायण
नाम का कारण

इस दिन को 'रथ सप्तमी' क्यों कहा जाता है?

इस दिन भगवान सूर्य अपने सात घोड़ों वाले दिव्य रथ पर सवार होकर नई ऊर्जा के साथ उत्तर दिशा (उत्तरायण) की ओर बढ़ते हैं, इसलिए इसे रथ सप्तमी कहते हैं।

रथ संचालनउत्तरायणसप्ताश्व
व्रत नियम और संकल्प

मंगलवार का व्रत कब से शुरू करना चाहिए?

मंगलवार का व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से शुरू करना चाहिए। अगर सूर्य उत्तरायण में हो या ज्येष्ठ मास का 'बड़ा मंगल' हो, तो यह और भी उत्तम माना जाता है।

व्रत प्रारंभशुभ मुहूर्तज्येष्ठ मास
त्योहार पूजा

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का क्या धार्मिक कारण है?

पतंग: सूर्य स्वागत (उत्तरायण), ऊर्ध्वगामी=शुभता (गीता 8.24 — देवयान), सूर्य स्नान (Vitamin D — सर्दी मुक्ति), ऋतु उत्सव (शीत विदाई), सामुदायिक मेलजोल। चीनी मांजा=पक्षी हत्या — सूती डोर प्रयोग।

मकर संक्रांतिपतंगसूर्य
त्योहार पूजा

मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का क्या महत्व है?

तिल-गुड़ महत्व: धार्मिक — तिल = शनि प्रिय (मकर स्वामी), विष्णु वास, 6 प्रकार प्रयोग (स्नान-दान-हवन-भोजन-तर्पण-उबटन)। गुड़ = मिठास-सम्बंधों का प्रतीक। आयुर्वेदिक — तिल उष्ण (सर्दी में गर्मी), गुड़ ऊर्जा-लौह स्रोत। दान सर्वाधिक पुण्यदायी।

मकर संक्रांतितिल गुड़उत्तरायण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।