विस्तृत उत्तर
वैदिक और पौराणिक वाङ्मय में उत्तरायण को 'देवयान' (देवताओं का दिन) की संज्ञा दी गई है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरता की ओर तथा नकारात्मकता से सकारात्मक ऊर्जा की ओर ऊर्ध्वगमन का प्रतीक है।
वैदिक साहित्य के अनुसार दक्षिणायन को 'पितृयान' और उत्तरायण को 'देवयान' कहा गया है। दक्षिणायन की समाप्ति और उत्तरायण के प्रारंभ पर पितरों की विदाई और देवताओं के स्वागत का भाव अंतर्निहित है।
मकर संक्रांति उत्तरायण का प्रथम दिन है।
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