विस्तृत उत्तर
वेदान्त और पुराणों में मोक्ष की दो मुख्य प्रणालियाँ बताई गई हैं। सद्यो मुक्ति (तत्काल मोक्ष) वह है जो जो ज्ञानी इसी जन्म में निर्गुण ब्रह्म का साक्षात् कर लेते हैं उन्हें प्राप्त होती है। उनके प्राण शरीर से बाहर नहीं जाते बल्कि वे यहीं परब्रह्म में विलीन हो जाते हैं — न तस्य प्राणा उत्क्रामन्ति। सद्यो मुक्ति में सत्यलोक की यात्रा ही नहीं होती। क्रम मुक्ति (क्रमिक मोक्ष) वह है जो सगुण ब्रह्म की उपासना करने वाले और ऊर्ध्वरेता संन्यासियों को प्राप्त होती है। वे देवयान मार्ग से सत्यलोक जाते हैं, वहाँ कल्पों तक ब्रह्मज्ञान प्राप्त करते हैं और महाप्रलय में ब्रह्मा जी के साथ अंतिम मोक्ष पाते हैं। रामानुजाचार्य ने सिद्ध किया कि क्रम मुक्ति के अधिकारी भी अंततः मोक्ष ही पाते हैं।
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