विस्तृत उत्तर
भारतीय पंचांग व्यवस्था मुख्य रूप से चंद्र-आधारित है, परंतु मकर संक्रांति उन गिने-चुने पर्वों में से एक है जिसकी गणना पूर्णतः सौर-वर्ष (Solar Calendar) के आधार पर की जाती है।
इसका कारण यह है कि यह पर्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में संक्रमण — एक खगोलीय घटना — पर आधारित है। राशि परिवर्तन सूर्य की गति पर निर्भर है, चंद्रमा की नहीं। अतः इसकी गणना सौर-वर्ष से होती है।
यही कारण है कि मकर संक्रांति प्रतिवर्ष लगभग 14-15 जनवरी को ही पड़ती है।
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