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विस्तृत उत्तर
विभिन्न धर्मशास्त्रीय ग्रंथों, विशेषकर 'धर्मसिंधु', 'निर्णयसिंधु', 'मत्स्य पुराण', 'भविष्य पुराण' और 'स्कंद पुराण' के अनुसार मकर संक्रांति एक अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इस दिन किए गए स्नान, दान, जप और तप का फल अनंत कोटि गुणा माना गया है।
राजमार्तंड' ग्रंथ के अनुसार, अयन और विषुव संक्रांति के दिन किया गया दान सामान्य दिनों की अपेक्षा करोड़ों गुना (कोटिगुना) अधिक पुण्यदायी होता है।
धर्मसिंधु' में स्पष्ट उल्लेख है कि संक्रांति पर जो भी हव्य (देवताओं को) या कव्य (पितरों को) दान किया जाता है, वह भविष्य के जन्मों में सूर्य देव द्वारा साधक को लौटाया जाता है।
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