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विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म में मकर संक्रांति को 'दान-पर्व' की संज्ञा दी गई है।
राजमार्तंड' ग्रंथ के अनुसार, अयन और विषुव संक्रांति के दिन किया गया दान सामान्य दिनों की अपेक्षा करोड़ों गुना (कोटिगुना) अधिक पुण्यदायी होता है।
दान सदैव 'सुपात्र' (संयमी ब्राह्मण, असहाय, नेत्रहीन, या दरिद्र) को ही देना चाहिए।
धर्मसिंधु' में स्पष्ट उल्लेख है कि संक्रांति पर जो भी हव्य (देवताओं को) या कव्य (पितरों को) दान किया जाता है, वह भविष्य के जन्मों में सूर्य देव द्वारा साधक को लौटाया जाता है।
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