विस्तृत उत्तर
महापुराणों (विशेषकर मत्स्य और पद्म पुराण) में 'तिलधेनु' (तिल से निर्मित गाय) के दान का अत्यंत विशेष माहात्म्य बताया गया है। यह एक 'संवत्सर व्रत' (वार्षिक व्रत) की पूर्णता पर किया जाता है।
विधि: एक पवित्र और शुद्ध स्थान पर काले तिलों का एक बड़ा ढेर लगाकर उसे गाय (धेनु) का स्वरूप दिया जाता है। स्वर्ण से उसके सींग, रजत (चांदी) से खुर, और अन्य धातुओं या वस्त्रों से उसके विभिन्न अंग बनाए जाते हैं। इसका संकल्प कर, शिव-पार्वती (शंकर-गौरी) का ध्यान करते हुए योग्य ब्राह्मण को दान किया जाता है।
यह दान 'पापमोचन', 'चिंता-मुक्ति' और मृत्यु उपरांत एक कल्प तक 'शिव-लोक' या 'गौरी-लोक' की प्राप्ति कराता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





