विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस में प्रथम (मुख्य) कथा-संवाद शिवजी और पार्वतीजी के बीच है — शिवजी वक्ता हैं और पार्वतीजी श्रोता।
बालकाण्ड में शिवजी ने पार्वतीजी को विवाह के बाद कैलास पर रामकथा सुनाई। शिवजी ने कहा — 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — हे पार्वती! श्रीहरि के सुन्दर चरित्र सुनो।
यह मूल कथा-धारा है — शिवजी-पार्वती संवाद के भीतर ही अन्य तीन संवाद (काकभुशुण्डि-गरुड़, याज्ञवल्क्य-भरद्वाज, तुलसीदास-संत) आते हैं।





