विस्तृत उत्तर
पारंपरिक आचार में 'सौ सीढ़ी दान' (100 वस्तुओं का दान) का भी विधान है। इसमें साधक एक वर्ष के भीतर या संक्रांति के दिन सौ विभिन्न वस्तुएँ (जैसे दाल, चावल, कंबल, बर्तन, नमक, स्वर्ण, रजत आदि) तोलकर दान करता है।
यदि स्वर्ण या रजत दान करने का सामर्थ्य न हो, तो चने की दाल में एक छोटा स्वर्ण आभूषण (जैसे लौंग) रखकर उसे स्वर्ण-दान का रूप दिया जा सकता है, और चावल में चांदी का अंश रखकर उसे रजत-दान माना जा सकता है।
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