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दान विधान प्रश्नोत्तर — 12 प्रश्न

दान विधान से जुड़े 12 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 12 प्रश्न

गरीब हो तो मकर संक्रांति पर क्या दान करें?

भविष्य पुराण: गरीब हो तो केवल फलों का दान = गोदान के समान पुण्य। क्षमता अनुसार मंत्र-सहित या मंत्र-रहित दान सभी के लिए मान्य। यह पर्व सबसे समरस और समावेशी है।

गरीब दानफल दानगोदान पुण्य
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'सौ सीढ़ी दान' क्या होता है?

सौ सीढ़ी दान = संक्रांति पर 100 विभिन्न वस्तुएँ (दाल, चावल, कंबल, बर्तन, नमक, स्वर्ण, रजत आदि) तोलकर दान। सामर्थ्य न हो तो: चने की दाल में छोटा सोने का आभूषण = स्वर्ण-दान; चावल में चांदी = रजत-दान।

सौ सीढ़ी दान100 वस्तुएंस्वर्ण रजत
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मकर संक्रांति पर तांबे के पात्र का दान क्यों करते हैं?

मत्स्य पुराण: मकर संक्रांति पर तांबे के पात्र का दान करें। फल: शरीर में सकारात्मक ऊर्जा + आयु, आरोग्य, यश और सौभाग्य में वृद्धि।

तांबे का पात्र दानआयु आरोग्यसकारात्मक ऊर्जा
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मकर संक्रांति पर गाय का दान क्यों करते हैं?

मत्स्य पुराण: मकर संक्रांति पर सवत्सा गाय (बछड़े सहित) = यम, रुद्र और धर्म के नाम पर संयमी ब्राह्मण को दान। गरीब हो तो: केवल फलों का दान = गोदान के समान पुण्य।

गाय दानसवत्सा धेनुमत्स्य पुराण
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मकर राशि में जन्मे लोगों को क्या दान देना चाहिए?

मकर राशि के लिए दान: ईंधन (लकड़ी) + अग्नि (अंगीठी/हीटर) + तिल + कंबल। शास्त्रीय कारण: मकर संक्रांति शीतकाल का चरमोत्कर्ष — अग्नि/ईंधन का दान = दरिद्रों को शीत से रक्षा।

मकर राशि दानईंधन दानतिल कंबल
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मकर संक्रांति पर राशि अनुसार क्या दान करें?

राशि अनुसार दान: मेष = ऊनी वस्त्र; वृषभ = गाय-चावल; मिथुन = हरे मूंग; कर्क = घी-चांदी; सिंह = स्वर्ण-गेहूं; कन्या = अन्न-बीज; तुला/वृश्चिक = वस्त्र; धनु = चने की दाल; मकर = तिल-कंबल-ईंधन; कुम्भ = जल-घड़े; मीन = पुष्प-मिष्ठान।

राशि अनुसार दानभविष्य पुराणस्कंद पुराण
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तिलधेनु दान का मंत्र क्या है?

तिलधेनु दान मंत्र: 'देवदेव जगन्नाथ प्रीयतां भूर्भुवः स्वः। पिता पितामहः प्रपितामहश्च प्रीयताम्।' अर्थ: हे जगन्नाथ! तीनों लोक प्रसन्न हों। मेरे पिता, पितामह और प्रपितामह प्रसन्न हों।

तिलधेनु दान मंत्रदेवदेव जगन्नाथपितामह
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तिलधेनु दान क्या है और कैसे करते हैं?

तिलधेनु दान: काले तिलों का ढेर = गाय का रूप। स्वर्ण सींग + रजत खुर + अन्य धातुओं से अंग। शिव-पार्वती का ध्यान करके योग्य ब्राह्मण को दान। फल: पापमोचन, चिंता-मुक्ति, एक कल्प तक शिव-लोक/गौरी-लोक।

तिलधेनु दानकाले तिल गायस्वर्ण सींग
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मत्स्य पुराण के अनुसार मकर संक्रांति पर क्या दान करें?

मत्स्य पुराण: तीन पात्र अन्न + सवत्सा गाय (बछड़े सहित) = यम, रुद्र, धर्म के नाम पर। सामर्थ्य हो तो: सोने के आभूषण, शैय्या, तांबे के पात्र। तांबे के पात्र का दान = आयु, आरोग्य, यश, सौभाग्य वृद्धि।

मत्स्य पुराण दानतीन पात्र अन्नगाय दान
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मकर संक्रांति पर किसे दान देना चाहिए?

दान देने के सुपात्र: संयमी ब्राह्मण, असहाय, नेत्रहीन, दरिद्र। महिलाएँ: सुहाग-सामग्री, मिट्टी/पीतल पात्र, कुमकुम, हल्दी, अन्न। भविष्य पुराण: सभी वर्ण-आयु के लोगों को क्षमतानुसार दान का अधिकार।

दान सुपात्रब्राह्मण दरिद्रनेत्रहीन
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मकर संक्रांति पर दान का क्या महत्व है?

मकर संक्रांति = 'दान-पर्व'। राजमार्तंड: इस दिन दान = सामान्य दिनों से करोड़ों गुना (कोटिगुना) पुण्य। सुपात्र को दान दें। धर्मसिंधु: संक्रांति का दान भविष्य जन्मों में सूर्य देव द्वारा लौटाया जाता है।

मकर संक्रांति दानदान पर्वराजमार्तंड
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रथ सप्तमी के दिन क्या दान करना सबसे शुभ होता है?

इस दिन तांबे के बर्तन में 'तिल' रखकर दान करना सबसे अच्छा माना जाता है। अज्ञानता मिटाने के लिए घी का दीप-दान करना चाहिए। इसके अलावा लाल कपड़े, गुड़ और अन्न का दान करना चाहिए।

दानतिलदीप दान
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दान विधान — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर दान विधान श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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दान विधान को गहराई से समझने का तरीका

दान विधान प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

12 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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