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ज्योतिर्लिंग प्रश्नोत्तर — 13 प्रश्न

ज्योतिर्लिंग से जुड़े 13 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 13 प्रश्न

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा क्या है?

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के ॐ आकार द्वीप पर है। राजा मांधाता की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। नर्मदा स्वयं इस द्वीप की परिक्रमा करती है।

ओंकारेश्वरनर्मदाओम द्वीप
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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की कथा क्या है?

कुंभकर्ण पुत्र भीमासुर ने ब्रह्मा से वरदान लेकर तीनों लोकों में आतंक मचाया। शिव ने ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर भीमासुर का वध किया और देवताओं के आग्रह पर भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग रूप में वहाँ विराजित हो गए। शिव के पसीने से भीमा नदी निकली।

भीमाशंकरभीमासुरकुंभकर्ण पुत्र
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त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा क्या है?

ब्रह्मगिरि पर महर्षि गौतम पर गोहत्या का षड्यंत्रपूर्ण आरोप लगा। गौतम की घोर तपस्या से शिव प्रकट हुए। गंगा की शर्त पर शिव त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग रूप में विराजे और गंगा गोदावरी नाम से प्रकट हुई। यहाँ त्रिदेव एक लिंग में विराजते हैं।

त्र्यंबकेश्वरगौतम ऋषिगोदावरी
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वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा क्या है?

रावण ने नौ सिर अर्पित कर शिव को प्रसन्न किया। शिव ने रावण के सिर जोड़े (वैद्य=चिकित्सक)। आत्मलिंग लेकर लंका जाते समय विष्णु लीला से देवघर में भूमि पर रख गया। वहीं वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग स्थापित हो गया।

वैद्यनाथरावणदेवघर
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केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?

पहली कथा — नर-नारायण ऋषि की तपस्या से शिव केदार श्रृंग पर ज्योतिर्लिंग रूप में विराजे। दूसरी कथा — पांडव भ्रातृहत्या पाप से मुक्ति के लिए आए, शिव भैंसा बने, भीम ने पीठ पकड़ी, वही त्रिकोणाकार भाग केदारनाथ में पूजित हुआ।

केदारनाथपांडवभ्रातृहत्या
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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग किस स्थान पर है और इसकी कथा क्या है?

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में श्रीशैल पर्वत पर कृष्णा तट पर है। कार्तिकेय के रुष्ट होकर क्रौंच पर्वत जाने पर शिव-पार्वती उनके निकट श्रीशैल पर विराजे। मल्लिका=पार्वती, अर्जुन=शिव — दोनों यहाँ एकसाथ पूजित हैं।

मल्लिकार्जुनश्रीशैलआंध्र प्रदेश
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन में ही क्यों है?

उज्जैन में दूषण राक्षस के अत्याचार से त्रस्त शिवभक्तों की पुकार पर शिव भूमि फाड़कर प्रकट हुए और दूषण का वध किया। भक्तों के अनुरोध पर वे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग रूप में वहीं विराजित हो गए। काल के स्वामी होने से 'महाकाल' कहलाए।

महाकालेश्वरउज्जैनमहाकाल
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शिव के ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होने की कथा क्या है लिंग पुराण के अनुसार?

लिंग पुराण के अनुसार ब्रह्मा-विष्णु के श्रेष्ठता-विवाद में शिव अनंत प्रकाश स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) रूप में प्रकट हुए। विष्णु ने अंत न पाकर सत्य स्वीकारा; ब्रह्मा ने झूठ बोला तो श्राप मिला। वह अनंत ज्योति-स्तंभ ही ज्योतिर्लिंग कहलाया।

ज्योतिर्लिंग प्रकटनलिंग पुराणब्रह्मा विष्णु विवाद
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शिव पुराण में कितने ज्योतिर्लिंगों का वर्णन है?

शिव पुराण में कुल 64 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है, जिनमें से 12 सर्वाधिक पवित्र 'महाज्योतिर्लिंग' हैं। सोमनाथ से लेकर घुश्मेश्वर तक ये 12 ज्योतिर्लिंग भारत के विभिन्न स्थानों पर स्थित हैं। इनके नाम का पाठ सात जन्मों के पाप नष्ट करता है।

12 ज्योतिर्लिंगशिव पुराण64 ज्योतिर्लिंग
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काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व शिव पुराण में क्या बताया गया है?

शिव पुराण के अनुसार काशी शिव की नगरी है जो प्रलय में भी नष्ट नहीं होती। यहाँ मृत्यु पर शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं, इसलिए काशी मोक्षदायिनी है। विश्वनाथ के दर्शन मात्र से समस्त तीर्थों का फल मिलता है।

काशी विश्वनाथमोक्षतारक मंत्र
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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा क्या है?

दारुका राक्षस ने शिवभक्त सुप्रिय वैश्य को समुद्र में पकड़कर कैद किया। कारागार में सुप्रिय की पुकार सुनकर शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए, सुप्रिय को पाशुपतास्त्र दिया जिससे दारुक का वध हुआ। वह ज्योतिर्लिंग नागेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुआ।

नागेश्वरदारुका राक्षससुप्रिय वैश्य
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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा क्या है?

चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने रोहिणी-पक्षपात के कारण क्षय रोग का श्राप दिया। प्रभास क्षेत्र में शिव की घोर तपस्या के बाद शिव ने वरदान दिया — शुक्ल पक्ष में बढ़ेंगे, कृष्ण पक्ष में घटेंगे। चंद्र (सोम) के नाम पर शिवलिंग 'सोमनाथ' कहलाया।

सोमनाथचंद्रमादक्ष श्राप
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ज्योतिर्लिंग — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर ज्योतिर्लिंग श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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ज्योतिर्लिंग को गहराई से समझने का तरीका

ज्योतिर्लिंग प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

13 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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