विस्तृत उत्तर
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है और इसकी कथा चंद्रमा की भक्ति और शिव की कृपा का अनुपम उदाहरण है।
शिव पुराण के अनुसार प्रजापति दक्ष की 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव (सोम) से हुआ था। परंतु चंद्रमा की अतिशय आसक्ति केवल रोहिणी के प्रति थी — शेष 26 पत्नियाँ उपेक्षित रहती थीं। व्यथित पत्नियों ने पिता दक्ष से शिकायत की। दक्ष ने चंद्रमा को अनेक बार समझाया, परंतु चंद्रमा ने उनकी बात न मानी। तब क्रोधित दक्ष ने चंद्रमा को श्राप दिया — 'तुम्हें क्षय रोग हो जाए।'
श्राप के प्रभाव से चंद्रमा की कलाएं घटने लगीं और उनका तेज क्षीण होने लगा। सम्पूर्ण सृष्टि में हाहाकार मच गया क्योंकि चंद्रमा के क्षय से वनस्पतियाँ और जीवन संकटग्रस्त हो गया। ब्रह्माजी की सलाह पर चंद्रमा ने गुजरात के प्रभास क्षेत्र में जाकर मृत्युंजय भगवान शिव की छह माह तक घोर तपस्या की।
शिव जी प्रसन्न हुए और बोले — 'मैं दक्ष के श्राप को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता, परंतु उसे संतुलित करता हूँ। कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन तुम्हारी एक कला क्षीण होगी और शुक्ल पक्ष में बढ़ेगी।' तब से चंद्रमा घटते-बढ़ते रहते हैं। चंद्रमा (सोम) ने जिस शिवलिंग की स्थापना की, वह 'सोमनाथ' — सोम के नाथ — कहलाए। यही प्रथम ज्योतिर्लिंग है।





