विस्तृत उत्तर
चंद्रमा समुद्र मंथन से दिव्य शीतल प्रकाश के रूप में प्रकट हुए। मंथन से निकले रत्नों में चंद्रमा का स्थान विशेष है, क्योंकि वे शांति, अमृत, औषधि और शीतलता के प्रतीक माने जाते हैं। समुद्र से उत्पन्न चंद्रमा को भगवान शिव ने अपने मस्तक पर धारण किया। यह भी महत्त्वपूर्ण है कि शिव ने पहले हलाहल विष को कंठ में रखा था, और चंद्रमा की शीतलता उनके दिव्य स्वरूप को और संतुलित करती है। इसीलिए शिव को चंद्रशेखर भी कहा जाता है। समुद्र मंथन में चंद्रमा का प्राकट्य ब्रह्मांड में शीतलता और लय का प्रतीक है।
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