शिव मंदिरसोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा का विशेष विधान क्या है?12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम। चंद्रदेव (सोम) ने शापमुक्ति हेतु शिव तपस्या कर स्वर्ण मंदिर बनवाया (शिव पुराण, ऋग्वेद)। अरब सागर तट पर — बाणस्तम्भ (दक्षिण ध्रुव तक अबाधित)। 3 दैनिक आरतियां। रुद्राभिषेक, सवालाक्ष बिल्व, नवग्रह जाप। त्रिवेणी संगम स्नान। कृष्ण देहत्याग स्थल।#सोमनाथ#ज्योतिर्लिंग#गुजरात
मंत्र साधनाक्रोध कम करने का शिव मंत्रक्रोध और मानसिक ताप को शांत करने के लिए 'ॐ शान्ताय नमः' या जल को अभिमंत्रित कर 'ॐ नमः शिवाय' का प्रयोग करना चाहिए। यह शरीर के अग्नि तत्व को शांत करता है।
लोकचंद्रमा समुद्र मंथन से कैसे निकले?चंद्रमा समुद्र मंथन से प्रकट हुए और भगवान शिव ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण किया।#चंद्रमा#समुद्र मंथन#शिव
लोकपाताल लोक में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश क्यों नहीं पहुँचता?पाताल लोक पृथ्वी के नीचे अधोलोकों में स्थित है, इसलिए सूर्य-चंद्र का प्रत्यक्ष प्रकाश वहाँ नहीं पहुँचता; प्रकाश नागमणियों से होता है।#पाताल लोक#सूर्य#चंद्रमा
लोकवितल लोक का तापमान कैसा रहता है?वितल लोक का तापमान हमेशा अनुकूल और सुखद रहता है; वहाँ सूर्य की गर्मी और चंद्रमा की ठंड कष्ट नहीं देती।#वितल तापमान#सूर्य#चंद्रमा
लोकत्रिपुर दहन में सूर्य और चंद्रमा की भूमिका क्या थी?सूर्य और चंद्रमा शिव के त्रिपुर दहन रथ के पहिए बने।#सूर्य#चंद्रमा#त्रिपुर दहन
लोकतलातल का प्रकाश चंद्रमा जैसा कैसे है?तलातल का प्रकाश चंद्रमा जैसा उज्ज्वल है, पर उसमें कष्टकारी शीतलता नहीं है।#तलातल प्रकाश#चंद्रमा#शीतलता
लोकतलातल में सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश क्यों नहीं पहुँचता?तलातल अधोलोक है, इसलिए सूर्य-चंद्रमा का प्रकाश नहीं पहुँचता; नाग-मणियाँ इसे प्रकाशित करती हैं।#तलातल प्रकाश#सूर्य#चंद्रमा
लोकक्या जनलोक में सूर्य और चंद्रमा की जरूरत होती है?नहीं, जनलोक आत्मिक तेज और परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित होता है।#जनलोक#सूर्य#चंद्रमा
लोकक्या तपोलोक में सूर्य और चंद्रमा प्रकाश देते हैं?नहीं, तपोलोक में सूर्य और चंद्रमा नहीं, बल्कि आत्म-तेज और तपस्या की ऊर्जा प्रकाश देती है।#तपोलोक#सूर्य#चंद्रमा
पंचांग एवं ज्योतिषश्रवण नक्षत्र क्या होता है?श्रवण 27 नक्षत्रों में 22वाँ। मकर 10°–23°20'। स्वामी चंद्रमा, देवता विष्णु। प्रतीक तीन पदचिह्न। विद्यारंभ-मंत्रदीक्षा के लिए शुभ। जन्म में बुद्धिमान, जिज्ञासु, सुशील, यात्राप्रिय।#श्रवण नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषहस्त नक्षत्र क्या होता है?हस्त 27 नक्षत्रों में त्रयोदश। कन्या 10°–23°20'। स्वामी चंद्रमा, देवता सविता। प्रतीक हथेली। हस्त-कौशल और व्यापार के लिए शुभ। जन्म में कुशल, चतुर, कलात्मक, श्रमशील।#हस्त नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
पंचांग एवं ज्योतिषरोहिणी नक्षत्र क्या होता है?रोहिणी 27 नक्षत्रों में चतुर्थ, नक्षत्रों की रानी। वृषभ 10°–23°20'। स्वामी चंद्रमा, देवता ब्रह्मा। प्रतीक बैलगाड़ी। सभी शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम। जन्म में सुंदर, कलाप्रेमी, समृद्ध।#रोहिणी नक्षत्र#27 नक्षत्र#पंचांग
दैनिक आचारगणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से दोष लगता है क्याहाँ — भागवत पुराण (10.57) आधारित। गणेश ने चंद्र को शाप दिया; कृष्ण को भी स्यमंतक मणि चोरी का कलंक लगा। उपाय: 'सिंहः प्रसेनमवधीत्...' 21-108 बार + स्यमंतक कथा पढ़ें + गणेश पूजन। पौराणिक शास्त्रीय आधार।#गणेश चतुर्थी#चंद्रमा#कलंक
दैनिक आचारसोमवार को कौन सा रंग पहनना शुभ हैसोमवार = सफेद/क्रीम/हल्का नीला (चंद्रमा/शिव)। सप्ताह: सोम-सफेद, मंगल-लाल, बुध-हरा, गुरु-पीला, शुक्र-सफेद/गुलाबी, शनि-काला/नीला, रवि-लाल/केसरिया। ज्योतिष परंपरा — वैदिक में नहीं।#सोमवार#रंग#चंद्रमा
स्वप्न शास्त्रसपने में चांद दिखने का मतलबचांद = शुभ। मन की शांति, प्रेम, माता कृपा, सफलता, यश। पूर्णिमा=सर्वश्रेष्ठ; अर्ध=प्रयत्न जारी; ग्रहण=सावधानी। चंद्र = मन का देवता; शिव भूषण। सार्वभौमिक शुभ प्रतीक।#चांद#चंद्रमा#सपना
त्योहार पूजागणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखना अशुभ क्यों माना जाता है?चन्द्र अशुभ: चन्द्रमा ने गणेश का उपहास → श्राप: 'देखने वाले पर मिथ्या दोष।' कृष्ण पर भी स्यमंतक आरोप। उपाय: स्यमंतक कथा + 'सिंहः प्रसेनम...' मंत्र + गणेश व्रत।#गणेश चतुर्थी#चंद्रमा#श्राप
त्योहार पूजाशरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की 16 कलाओं का क्या महत्व है?16 कला: अमृता से पूर्णामृता तक=पूर्णतम चन्द्रमा, अमृत वर्षा (खीर चाँदनी में), कोजागरी लक्ष्मी ('को जागर्ति?'=जागने वाले को कृपा), पित्त शांति (आयुर्वेद), कृष्ण महारास (भागवत)। खीर+जागरण+लक्ष्मी पूजा।#शरद पूर्णिमा#16 कला#चंद्रमा
त्योहार पूजाकरवा चौथ पर चलनी से चंद्रमा क्यों देखते हैं?चलनी: शुद्ध दृष्टि (दोष छानना=गुण देखना), वीरवती कथा (भ्रम बचाव=सही चन्द्रमा पहचान), अनेक प्रतिबिम्ब (सुन्दर दृश्य), पति=चन्द्रमा तुल्य (शीतल, दीर्घायु), धातु=शुद्धिकारक। आदर्श दाम्पत्य प्रतीक।#करवा चौथ#चलनी#छलनी
गर्भ संस्कारप्रेग्नेंसी में चंद्रमा पूजा का क्या लाभ?चंद्र=मन+माता+शिशु कारक। शांति(हार्मोनल तनाव कम), शिशु स्वस्थ+सुंदर। सोमवार व्रत, पूर्णिमा 'ॐ सोम सोमाय' 108। दूध/सफ़ेद=चंद्र प्रिय। चंद्र प्रकाश=Melatonin/नींद। डॉक्टर=प्राथमिक।#गर्भावस्था#चंद्रमा#पूजा
ज्योतिर्लिंगसोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा क्या है?चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने रोहिणी-पक्षपात के कारण क्षय रोग का श्राप दिया। प्रभास क्षेत्र में शिव की घोर तपस्या के बाद शिव ने वरदान दिया — शुक्ल पक्ष में बढ़ेंगे, कृष्ण पक्ष में घटेंगे। चंद्र (सोम) के नाम पर शिवलिंग 'सोमनाथ' कहलाया।#सोमनाथ#चंद्रमा#दक्ष श्राप