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विस्तृत उत्तर
तलातल का प्रकाश चंद्रमा की भाँति प्रकाशमान बताया गया है, लेकिन उसमें चंद्रमा जैसी कष्टकारी शीतलता नहीं होती। यहाँ सूर्य की दाहकता भी नहीं है और चंद्रमा की शीत ऋतु जैसी ठंडक भी नहीं है। वातावरण में मृदु, सुखद और संतुलित उजाला फैला रहता है। यह प्रकाश नागों की मणियों से उत्पन्न होकर तलातल को निरंतर प्रकाशित रखता है।
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