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त्योहार पूजा📜 विष्णु पुराण, भागवत पुराण, ज्योतिष, आयुर्वेद2 मिनट पठन

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की 16 कलाओं का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

16 कला: अमृता से पूर्णामृता तक=पूर्णतम चन्द्रमा, अमृत वर्षा (खीर चाँदनी में), कोजागरी लक्ष्मी ('को जागर्ति?'=जागने वाले को कृपा), पित्त शांति (आयुर्वेद), कृष्ण महारास (भागवत)। खीर+जागरण+लक्ष्मी पूजा।

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विस्तृत उत्तर

शरद पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा) = चन्द्रमा सम्पूर्ण 16 कलाओं से युक्त:

  1. 116 कला = पूर्णता: चन्द्रमा की 16 कलाएँ = अमृता, मानदा, पूषा, तुष्टि, पुष्टि, रति, धृति, शशिनी, चन्द्रिका, कान्ति, ज्योत्स्ना, श्री, प्रीति, अंगदा, पूर्णा, पूर्णामृता। शरद पूर्णिमा = सभी 16 कला प्रकट = चन्द्रमा पूर्णतम।
  1. 1अमृत वर्षा: मान्यता: इस रात चन्द्रमा अपनी 16 कलाओं से अमृत वर्षा करता है। चन्द्र प्रकाश = अमृत तुल्य। इसलिए खीर (दूध+चावल) चाँदनी में रखते हैं = अमृतमय खीर।
  1. 1कोजागरी लक्ष्मी पूजा: इस रात लक्ष्मी भ्रमण करती हैं — 'को जागर्ति?' (कौन जागा है?)। जागने वाले को लक्ष्मी कृपा। इसलिए रात्रि जागरण।
  1. 1आयुर्वेद: शरद ऋतु = पित्त प्रकोप। चन्द्र प्रकाश = शीतल = पित्त शांति। चाँदनी में रखी खीर = औषधिमय (चन्द्र किरणों से शीतल+पवित्र)।
  1. 1कृष्ण रास: भागवत: इसी रात कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास लीला रची = दिव्य प्रेम उत्सव।

विधि: रात्रि = खीर चाँदनी में रखें → लक्ष्मी पूजा → जागरण → प्रातः खीर = प्रसाद।

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शास्त्रीय स्रोत
विष्णु पुराण, भागवत पुराण, ज्योतिष, आयुर्वेद
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