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विस्तृत उत्तर
वितल लोक का तापमान सदैव अत्यंत अनुकूल और सुखद रहता है। श्री विष्णु पुराण के अनुसार वितल लोक में सूर्य की सूक्ष्म किरणें केवल प्रकाश देती हैं, पर धूप का कष्ट और संताप नहीं देतीं। इसी प्रकार चंद्रमा की किरणें केवल सुखद चाँदनी बिखेरती हैं, पर उनसे ठिठुरन पैदा करने वाली शीतलता नहीं होती। इसलिए वहाँ न असहनीय गर्मी है, न कष्टदायक ठंड। वितल लोक का वातावरण भौतिक संताप से रहित और ऐंद्रिय सुख, विलासिता तथा मायावी सौंदर्य से परिपूर्ण है।
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