विस्तृत उत्तर
सोमनाथ (गुजरात) 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। इसकी पूजा परंपरा अन्य ज्योतिर्लिंगों से कई मायनों में विशिष्ट है:
पौराणिक कथा (शिव पुराण)
चंद्रदेव (सोम) को प्रजापति दक्ष ने क्षय रोग का शाप दिया। मुक्ति हेतु चंद्रदेव ने प्रभास क्षेत्र (अरब सागर तट) पर शिव की तपस्या की। प्रसन्न शिव ने शापमुक्ति दी। चंद्रदेव ने इस स्थान पर स्वर्ण मंदिर बनवाया — 'सोम' (चंद्र) + 'नाथ' (स्वामी) = सोमनाथ। ऋग्वेद में भी सोमेश्वर महादेव की महिमा उल्लेखित।
विशेष पूजा विधान
1समुद्र तट पर स्थिति
सोमनाथ अरब सागर के तट पर है — अन्य ज्योतिर्लिंगों में यह अनूठा। मंदिर के पृष्ठ भाग में 'बाणस्तम्भ' है जो दर्शाता है कि इस देशांतर पर मंदिर और दक्षिण ध्रुव के बीच कोई भूभूमि नहीं ('आसमुद्रान्त दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग')।
2तीन दैनिक आरतियां
सोमनाथ मंदिर में प्रतिदिन तीन आरतियां होती हैं — सुबह, दोपहर और संध्या।
3विशेष अभिषेक
मंदिर में रुद्राभिषेक, सवालाक्ष बिल्व पूजा, कालसर्प योग निवारण विधि, शिवपुराण पाठ, महादुग्ध अभिषेक, गंगाजल अभिषेक और नवग्रह जाप की विशेष व्यवस्था है।
4लाइट एंड साउंड शो
शाम 7:30-8:30 बजे 'जय सोमनाथ' — सोमनाथ के गौरवशाली और दुखद इतिहास (गजनवी आक्रमण, पुनर्निर्माण) को दर्शाता भव्य शो।
5त्रिवेणी संगम
कपिला, हिरण्या और सरस्वती — तीन नदियों का संगम इस क्षेत्र में है। स्नान का विशेष महत्व।
6श्रीकृष्ण लीला संवरण
इसी प्रभास क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया — अतः वैष्णव तीर्थ भी।
दर्शन समय: सुबह 6 बजे से रात 9 बजे (गर्मियों में 10 बजे) तक।





