विस्तृत उत्तर
केदारनाथ (उत्तराखंड, रुद्रप्रयाग) 12 ज्योतिर्लिंगों और चार धाम दोनों में शामिल है — यह सर्वाधिक ऊंचाई (11,755 फीट) पर स्थित ज्योतिर्लिंग है। इसकी अनेक विशिष्टताएं हैं:
1त्रिकोणाकार शिवलिंग — बैल की पीठ
केदारनाथ का शिवलिंग सामान्य लिंगाकृति में नहीं, बल्कि त्रिकोणाकार शिला (बैल/भैंसे की पीठ जैसा) के रूप में है। अन्य सभी ज्योतिर्लिंगों में शिवलिंग गोलाकार/अंडाकार है।
पौराणिक कथा (शिव पुराण/महाभारत — शोध सत्यापित)
महाभारत युद्ध के बाद पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति हेतु शिव की खोज में हिमालय पहुंचे। शिव बैल (महिष) का रूप धारण कर छिप गए। भीम ने बैल को पहचान लिया और पकड़ने का प्रयास किया — बैल भूमि में समाने लगा, किन्तु भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ पकड़ ली। शिव प्रसन्न हुए और पांडवों को पापमुक्ति दी।
2पंचकेदार — पांच अंगों की पूजा
शिव के बैल रूप के भिन्न अंग पांच स्थानों पर प्रकट हुए:
- ▸केदारनाथ: पृष्ठ भाग (पीठ)
- ▸तुंगनाथ: भुजाएं
- ▸रुद्रनाथ: मुख
- ▸मद्महेश्वर: नाभि
- ▸कल्पेश्वर: जटा
केदारनाथ + पशुपतिनाथ (नेपाल) मिलकर पूर्ण शिवलिंग बनता है (अग्र भाग नेपाल में)।
3छह माह बंद
दीपावली के बाद कपाट बंद — शिवलिंग उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में स्थानांतरित। अप्रैल-मई में पुनः खुलता है।
4विग्रह रूप में पूजा
यहां शिवलिंग की आकृति बैल की पीठ जैसा त्रिकोणीय है — विग्रह (आकार विशेष) रूप में पूजा।
5मंदिर वास्तुकला
कत्यूरी शैली — विशाल पत्थरों से निर्मित। आदि शंकराचार्य ने जीर्णोद्धार कराया (मंदिर पृष्ठभाग में शंकराचार्य समाधि)।
6गर्भगृह में अंधकार
गर्भगृह में गहन अंधकार — दीपक के सहारे ही दर्शन। शिवलिंग पर घृत (घी) अर्पित कर भक्त 'बाहं भरकर' (आलिंगन) मिलते हैं।
7पांडवों की मूर्तियां
मंदिर के जगमोहन में द्रौपदी सहित पांच पांडवों की विशाल मूर्तियां।





