विस्तृत उत्तर
रामेश्वरम (तमिलनाडु) 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है — यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जो भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम द्वारा स्थापित किया गया:
पौराणिक कथा (रामायण)
1रावण वध प्रायश्चित
वाल्मीकि रामायण (युद्ध कांड) के अनुसार, लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने रावण वध (ब्राह्मण होने के कारण ब्रह्महत्या दोष) से मुक्ति हेतु भगवान शिव की आराधना की। उन्होंने समुद्र तट (सेतुबंध) पर शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की।
2दो शिवलिंग
राम ने हनुमान जी को कैलाश से शिवलिंग लाने भेजा। हनुमान जी के विलंब होने पर सीता जी ने बालू (रेत) से शिवलिंग बनाया — यही 'रामलिंगम्' है। जब हनुमान जी कैलाश से शिवलिंग लाए, तो राम ने उसे भी स्थापित किया — यह 'विश्वलिंगम्' (हनुमदीश्वर) कहलाया। नियम: पहले विश्वलिंगम् (हनुमान वाला), फिर रामलिंगम् की पूजा।
पौराणिक महत्व
- ▸शिव-राम एकता: विष्णु अवतार (राम) द्वारा शिव पूजा — शैव-वैष्णव एकता का सर्वोत्तम प्रतीक।
- ▸ब्रह्महत्या प्रायश्चित: युद्ध के पश्चात शांति और प्रायश्चित का संदेश।
- ▸चार धाम में: रामेश्वरम दक्षिण दिशा का धाम — उत्तर (बद्रीनाथ), पूर्व (जगन्नाथ), पश्चिम (द्वारका)।
विशेष पूजा विधान
- ▸22 कुंडों (तीर्थ) में स्नान — प्रत्येक कुंड का अलग महत्व।
- ▸पहले विश्वलिंगम् पूजा, फिर रामलिंगम्।
- ▸समुद्र जल से अभिषेक।
needs_review: रामायण की विभिन्न शाखाओं में कथा में मामूली भिन्नता हो सकती है। वाल्मीकि रामायण और कम्ब रामायण के विवरण में अंतर।





