विस्तृत उत्तर
पंच केदार उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में भगवान शिव के पांच मंदिरों का समूह है:
पौराणिक कथा (शिव पुराण — शोध सत्यापित)
महाभारत युद्ध के बाद पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति हेतु शिव की खोज में हिमालय पहुंचे। शिव बैल रूप में छिप गए। भीम ने पकड़ा — बैल भूमि में समाने लगा। शिव के शरीर के पांच अंग पांच स्थानों पर प्रकट हुए:
क्रम और विवरण (शोध — OneIndia/Ecolekh)
| क्रम | केदार | शिव का अंग | ऊंचाई | जिला |
|------|--------|------------|--------|-------|
| 1 | केदारनाथ | पृष्ठ भाग (पीठ) | 11,755 ft | रुद्रप्रयाग |
| 2 | मद्महेश्वर | नाभि | 11,470 ft | रुद्रप्रयाग |
| 3 | तुंगनाथ | भुजाएं | 12,073 ft | रुद्रप्रयाग |
| 4 | रुद्रनाथ | मुख | 11,800 ft | चमोली |
| 5 | कल्पेश्वर | जटा | 7,217 ft | चमोली |
विशेषताएं
- ▸तुंगनाथ = विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर।
- ▸कल्पेश्वर = वर्षभर खुला (अन्य 4 शीतकाल में बंद)।
- ▸केदारनाथ + पशुपतिनाथ (नेपाल) = पूर्ण शिवलिंग (अग्र भाग नेपाल)।
यात्रा का महत्व
- ▸पांचों केदार के दर्शन = पांडवों जैसी पापमुक्ति।
- ▸शिव पुराण: इस कथा को पढ़ने मात्र से धन, यश, आयु वृद्धि और मोक्ष।
- ▸पंचकेदार यात्रा = उत्तराखंड की सबसे कठिन और पुण्यदायी तीर्थयात्राओं में से एक।





