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शिव मंदिर📜 शिव पुराण, स्कन्द पुराण (काशी खंड), काशी माहात्म्य1 मिनट पठन

काशी में मणिकर्णिका घाट पर शिव पूजा का क्या विशेष महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

शिव स्वयं मृतक को तारक मंत्र देते हैं — मोक्ष। अनादि अग्नि कभी नहीं बुझी। पार्वती मणिकुंडल गिरा → नाम। अविमुक्त क्षेत्र — शिव सदा निवास। पितृ तर्पण + शिव पूजा = अत्यंत पुण्य।

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विस्तृत उत्तर

मणिकर्णिका घाट (वाराणसी) हिंदू धर्म का सबसे पवित्र श्मशान और मोक्षदायक स्थान है:

पौराणिक कथा

शिव पुराण/स्कन्द पुराण: विष्णु ने तपस्या कर कुंड बनाया। शिव-पार्वती के दर्शन पर पार्वती का कर्णाभूषण (मणिकुंडल) कुंड में गिर गया — 'मणिकर्णिका' नाम पड़ा।

शिव पूजा का विशेष महत्व

  1. 1तारक मंत्र: काशी में मृत्यु होने पर शिव स्वयं मृत व्यक्ति के कान में तारक मंत्र (मोक्ष मंत्र) देते हैं — यहीं मोक्ष प्राप्त होता है।
  2. 2अविमुक्त क्षेत्र: काशी = शिव कभी नहीं छोड़ते — सदा निवास। मणिकर्णिका = काशी का हृदय।
  3. 3चिता अग्नि सनातन: यहां की चिता अग्नि अनादि काल से जल रही है — कभी बुझी नहीं।
  4. 4शिवलिंग पूजा: मणिकर्णिका पर शिवलिंग पूजा = सभी तीर्थों की पूजा के समान फल।
  5. 5पितृ तर्पण + शिव पूजा: दोनों एक साथ — अत्यंत पुण्यदायी।

काशी विश्वनाथ से संबंध: मणिकर्णिका → विश्वनाथ मंदिर = काशी का सबसे पवित्र मार्ग।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, स्कन्द पुराण (काशी खंड), काशी माहात्म्य
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