विस्तृत उत्तर
मणिकर्णिका घाट (वाराणसी) हिंदू धर्म का सबसे पवित्र श्मशान और मोक्षदायक स्थान है:
पौराणिक कथा
शिव पुराण/स्कन्द पुराण: विष्णु ने तपस्या कर कुंड बनाया। शिव-पार्वती के दर्शन पर पार्वती का कर्णाभूषण (मणिकुंडल) कुंड में गिर गया — 'मणिकर्णिका' नाम पड़ा।
शिव पूजा का विशेष महत्व
- 1तारक मंत्र: काशी में मृत्यु होने पर शिव स्वयं मृत व्यक्ति के कान में तारक मंत्र (मोक्ष मंत्र) देते हैं — यहीं मोक्ष प्राप्त होता है।
- 2अविमुक्त क्षेत्र: काशी = शिव कभी नहीं छोड़ते — सदा निवास। मणिकर्णिका = काशी का हृदय।
- 3चिता अग्नि सनातन: यहां की चिता अग्नि अनादि काल से जल रही है — कभी बुझी नहीं।
- 4शिवलिंग पूजा: मणिकर्णिका पर शिवलिंग पूजा = सभी तीर्थों की पूजा के समान फल।
- 5पितृ तर्पण + शिव पूजा: दोनों एक साथ — अत्यंत पुण्यदायी।
काशी विश्वनाथ से संबंध: मणिकर्णिका → विश्वनाथ मंदिर = काशी का सबसे पवित्र मार्ग।





