विस्तृत उत्तर
नागेश्वर (गुजरात, द्वारका के निकट) 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक:
नाम का अर्थ: 'नागेश्वर' = 'नागों के ईश्वर'। शिव = सर्पों/नागों के अधिपति (वासुकि गले में)।
पौराणिक कथा (शिव पुराण)
सुप्रिया नामक शिव भक्त को दारुक नामक राक्षस ने बंदी बनाया। सुप्रिया ने कारागार में 'ॐ नमः शिवाय' जप जारी रखा। शिव प्रकट हुए, राक्षस का नाश किया और 'नागेश्वर' ज्योतिर्लिंग के रूप में वहीं विराजमान हुए।
नाग दोष निवारण
- 1शिव = नागों के स्वामी: राहु-केतु = सर्प ग्रह। नागों के ईश्वर की शरण = सर्प ग्रह शांत।
- 2कालसर्प दोष: नागेश्वर पर विशेष पूजा — कालसर्प दोष निवारण में सहायक।
- 3सर्प भय: सर्प भय निवारण हेतु नागेश्वर पूजा।
- 4नागपंचमी: नागेश्वर पर नागपंचमी पूजा विशेष प्रभावी।
पूजा विधि
- ▸शिवलिंग पर दूध + काले तिल अभिषेक।
- ▸'ॐ नमः शिवाय' + 'ॐ नागेश्वराय नमः' 108 जप।
- ▸नाग प्रतिमा/चित्र सहित पूजा।
- ▸रुद्राभिषेक — नाग दोष शांति।
needs_review: नाग दोष = ज्योतिष परंपरा — पुराणों में स्पष्ट वर्णन सीमित।





