विस्तृत उत्तर
क्रोध अग्नि तत्व की अधिकता और मानसिक असंतुलन का परिणाम है। भगवान शिव, जिन्होंने अपने मस्तक पर शीतल चंद्रमा और जटाओं में गंगा को धारण किया है, क्रोध और ताप को शांत करने वाले सर्वोच्च देव हैं।
क्रोध को नियंत्रित करने के लिए 'ॐ शान्ताय नमः' या शिव के 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जल ध्यान विधि से जप करना चाहिए। जब भी अत्यधिक क्रोध आए, तो एक गिलास ठंडा जल लेकर उसमें देखते हुए 11 बार 'ॐ नमः शिवाय' बोलें और उस जल को पी लें। इसके अलावा, सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल की ठंडी धारा (अभिषेक) गिराते हुए शिव मंत्र का मानसिक जप करने से शरीर का अग्नि तत्व शांत होता है और साधक को धैर्य तथा मानसिक शीतलता प्राप्त होती है।





