विस्तृत उत्तर
गायत्री मंत्र (ऋग्वेद) सनातन धर्म का सबसे पवित्र महामंत्र है। इसमें 24 अक्षर हैं, और प्रत्येक अक्षर में एक विशिष्ट देवता और ऊर्जा का वास है। मूल मंत्र है: 'ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥'
इसका सरल और गहरा अर्थ इस प्रकार है:
ॐ (परमात्मा), भूः (प्राणस्वरूप/पृथ्वी), भुवः (दुःखनाशक/अंतरिक्ष), स्वः (सुखस्वरूप/स्वर्ग)।
तत् (उस), सवितुः (तेजस्वी सूर्य/ईश्वर), वरेण्यं (श्रेष्ठ/अपनाने योग्य), भर्गो (पापनाशक तेज), देवस्य (दिव्य स्वरूप का), धीमहि (हम ध्यान करते हैं)।
धियो (हमारी बुद्धि को), यो (जो), नः (हमारी), प्रचोदयात् (सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे)।
समग्र अर्थ: "उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अंतरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।"





