मंत्र साधनागायत्री मंत्र के 24 अक्षरों के 24 देवतागायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 अलग-अलग देवताओं (जैसे अग्नि, सूर्य, विष्णु, शिव, सरस्वती) का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके जप से शरीर की 24 ग्रंथियां और इन सभी देवताओं की शक्तियां जाग्रत होती हैं।#गायत्री मंत्र#24 अक्षर#देवता
भक्ति एवं आध्यात्मराधे राधे और हरे कृष्ण में क्या अंतरराधे राधे ब्रज-परंपरा का प्रेमपूर्ण अभिवादन है जिसमें श्रीराधारानी का स्मरण होता है। हरे कृष्ण कलिसंतरणोपनिषद् के षोडश-नाम महामंत्र का अंश है जिसे चैतन्य महाप्रभु ने प्रचारित किया — यह एक पूर्ण साधना मंत्र है।#राधे राधे
मंत्र साधनागायत्री मंत्र के 24 अक्षर और अर्थगायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) का अर्थ है: हम उस सर्वश्रेष्ठ, पापनाशक, तेजस्वी परमात्मा का ध्यान करते हैं। वह दिव्य शक्ति हमारी बुद्धि को सन्मार्ग (सत्य) की ओर प्रेरित करे।#गायत्री मंत्र#24 अक्षर#अर्थ
असितांग भैरव मंत्रअसितांग भैरव का मूल मंत्र क्या है?असितांग भैरव का मूल मंत्र: 'ॐ ह्रीं ह्रां ह्रीं ह्रुं जं क्लां क्लीं क्लुं ब्राह्मी देवी समेताय असिताङ्ग भैरवाय सर्व शाप निवर्तिताय ॐ ह्रीं फट् स्वाहा'।#असितांग भैरव मंत्र#शाप निवारक#महामंत्र
आपदुद्धारण महामंत्रबटुक भैरव का मूल मंत्र क्या है?बटुक भैरव का मूल मंत्र: 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं' — यह आपत्तियों का उद्धार करने वाला महामंत्र है।#बटुक भैरव मंत्र#आपदुद्धारण#महामंत्र
रामचरितमानस — बालकाण्डतुलसीदासजी ने राम नाम को शिवजी का प्राणप्रिय क्यों कहा?शिवजी स्वयं इस महामंत्र का जप करते हैं, काशी में मरने वालों को मुक्ति के लिये यही नाम उपदेश करते हैं, और एक राम नाम को हज़ार नामों के समान मानते हैं। नाम के प्रभाव से ही गणेशजी सबसे पहले पूजे जाते हैं।#बालकाण्ड#शिव#राम नाम
मंत्र एवं उपासनाहरे राम हरे कृष्ण महामंत्र की उत्पत्ति कैसे हुईहरे कृष्ण महामंत्र का स्रोत 'कलि-संतरण उपनिषद' है। इसमें ब्रह्माजी ने नारद को बताया कि कलियुग में 16 नामों का यह महामंत्र ही एकमात्र उपाय है। 15वीं सदी में चैतन्य महाप्रभु ने इसे जन-जन तक पहुँचाया।#हरे कृष्ण#महामंत्र#कलि-संतरण उपनिषद
मंत्रहरे कृष्ण महामंत्र के 16 शब्दों का अर्थ16 शब्द: हरे (ईश्वरीय शक्ति/राधा), कृष्ण (सर्वाकर्षक भगवान), राम (आनंददायक)। अर्थ: 'हे ईश्वरीय शक्ति, हे कृष्ण, हे राम — मुझे अपनी शरण/सेवा में लो।' कलिसंतरण उपनिषद: कलियुग में इन 16 नामों से मोक्ष। चैतन्य महाप्रभु ने जन-जन तक पहुंचाया।#हरे कृष्ण#महामंत्र#16 शब्द
मंत्र ज्ञानपूजा के दौरान कौन सा मंत्र सबसे महत्वपूर्ण है?सर्वश्रेष्ठ मंत्र: गायत्री (ॐ भूर्भुवः स्वः...) — ऋग्वेद 3.62.10 — वैदिक मंत्रों में सर्वोच्च। ॐ — मंडूक्य उपनिषद: 'ॐ ही सब कुछ है।' इष्ट देव का मंत्र: शिव — पंचाक्षरी; विष्णु — द्वादशाक्षरी; दुर्गा — नवार्ण। गीता: जपयज्ञ सर्वश्रेष्ठ यज्ञ।#गायत्री मंत्र#महामंत्र#ॐ