विस्तृत उत्तर
आधुनिक जीवन में अत्यधिक विचार, चिंता और तनाव मन की शांति को छीन लेते हैं। भगवान श्रीकृष्ण को 'आनंद' और 'प्रेम' का साक्षात स्वरूप (सच्चिदानंद) माना गया है। उनके मंत्रों की ध्वनि मन के सभी कोलाहल को शांत कर परमानंद की अनुभूति कराती है।
मानसिक शांति का सबसे सरल और मधुर मंत्र है—'ॐ क्लीं कृष्णाय नमः'। इसमें 'क्लीं' आकर्षण और प्रेम का बीज है, जो मन को भगवान के चरणों में एकाग्र करता है। जब मन बहुत बेचैन हो, तो आंखें बंद करके लंबी सांसें लेते हुए मानसिक रूप से 'कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥' का पाठ करना चाहिए। यह श्लोक समस्त क्लेशों (मानसिक दुःखों) का नाश करने वाला है और मस्तिष्क की नसों को शीतलता प्रदान करता है।





