विस्तृत उत्तर
यह सूर्य देव का तांत्रिक बीज मंत्र है। इसमें प्रयुक्त बीजाक्षर (ह्रां, ह्रीं, ह्रौं) सूर्य की प्रचंड अग्नि और जीवनदायिनी ऊर्जा का संघनित रूप हैं। सूर्य को प्रत्यक्ष देव और सभी रोगों का नाशक (सर्वरोगप्रणाशनम्) माना गया है।
इस मंत्र का मुख्य प्रभाव शारीरिक आरोग्य (विशेषकर हृदय, त्वचा और नेत्र रोग) और तेज में वृद्धि करना है। इसकी साधना के लिए प्रातःकाल सूर्योदय के समय पूर्वाभिमुख होकर (पूर्व दिशा की ओर) खड़ा होना चाहिए। तांबे के पात्र में जल, रोली और लाल पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करना अत्यधिक प्रभावशाली होता है। लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से इसका जप करने से व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है, निराशा दूर होती है और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।





