का सरल उत्तर
यह सूर्य का प्रचंड बीज मंत्र है। प्रातःकाल अर्घ्य देते समय इसका जप करने से नेत्र रोग, शारीरिक दुर्बलता और निराशा दूर होती है, तथा आत्मबल और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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