विस्तृत उत्तर
भगवान शिव के अनेक मंत्र हैं, परंतु तंत्र शास्त्र के अनुसार उनका सबसे छोटा और मूल मंत्र उनका एकाक्षरी (एक अक्षर वाला) बीज मंत्र 'ह्रौं' (Hroum) है। इसे शिव का 'प्रसाद बीज' भी कहा जाता है, जिसमें शिव की संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा समाहित है।
इसके अतिरिक्त, यदि वैदिक मंत्रों की बात करें, तो पंचाक्षर मंत्र 'नमः शिवाय' (बिना ॐ के) को भी सबसे सूक्ष्म और स्वतंत्र मंत्र माना गया है। शास्त्रों में विधान है कि स्त्रियां, बच्चे और बिना यज्ञोपवीत (जनेऊ) वाले जातक भी बिना ॐ लगाए केवल 'नमः शिवाय' का मानसिक जप कर सकते हैं। यह मंत्र इतना छोटा और शक्तिशाली है कि इसे चलते-फिरते या कार्य करते हुए जपने से सभी पाप भस्म हो जाते हैं और मन को असीम शांति मिलती है।





