मंत्र साधनासूर्य देव का 'ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' मंत्रयह सूर्य का प्रचंड बीज मंत्र है। प्रातःकाल अर्घ्य देते समय इसका जप करने से नेत्र रोग, शारीरिक दुर्बलता और निराशा दूर होती है, तथा आत्मबल और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।#सूर्य#बीज मंत्र#आरोग्य
मंत्र जप नियममंत्र जप की गति तेज होनी चाहिए या धीमी?मध्यम सर्वोत्तम। 'नातिशीघ्रं नातिविलम्बितम्।' शुरुआत: धीमी (सीखना)। अभ्यास: मध्यम (लय)। अनुष्ठान: मध्यम-तीव्र। शुद्धता > गति। लय/प्रवाह बनाएं।#गति#तेज#धीमी
मंत्र साधनासफलता पाने का सूर्य मंत्रहर कार्य में सफलता, आत्मबल और मान-सम्मान पाने के लिए प्रातःकाल तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जप करना चाहिए।#सफलता#सूर्य#मान-सम्मान
मंत्र साधनाआत्मविश्वास बढ़ाने का सूर्य मंत्रसूर्य देव आत्मविश्वास और ऊर्जा के प्रतीक हैं। प्रातःकाल सूर्य को अर्घ्य देते हुए 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जप करने से भय दूर होता है और अपार आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।#आत्मविश्वास#सूर्य देव#सफलता
लोकसप्तमी श्राद्ध से तेज कैसे मिलता है?सूर्य संबंध के कारण सप्तमी श्राद्ध तेज और ओज देता है।#सप्तमी श्राद्ध#तेज#सूर्य
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग१२ मुखी रुद्राक्ष का मंत्र और देवता कौन हैं?१२ मुखी रुद्राक्ष द्वादश आदित्य स्वरूप है, इसका मंत्र 'ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः' है और यह सूर्य जैसा तेज देता है।#12 मुखी#आदित्य#सूर्य
रुद्राक्षबारह मुखी रुद्राक्ष सूर्य देव प्रतीक12 मुखी = सूर्य (द्वादश आदित्य)। तेज, नेतृत्व, स्वास्थ्य, अधिकार, सूर्य शमन। 'ॐ क्रों क्षों रों नमः'। ₹1,000-15,000। सरकारी/नेतृत्व/स्वास्थ्य।#बारह मुखी#सूर्य#आदित्य
दैनिक आचाररविवार को लाल रंग पहनने का महत्वरविवार = लाल/केसरिया (सूर्य)। तेज, अधिकार, स्वास्थ्य, नेतृत्व। सूर्य पूजा, अर्घ्य। माणिक रत्न। ज्योतिष परंपरा।#रविवार#लाल#सूर्य
स्वप्न शास्त्रसपने में सूरज दिखने का शुभ अशुभसूर्य = शुभ। सफलता, यश, पिता कृपा, स्वास्थ्य, नेतृत्व। उगता सूर्य=सर्वश्रेष्ठ; ग्रहण=अशुभ। आयुर्वेद: पित्त दोष वृद्धि संकेत (चरक संहिता)। सूर्य = प्राण/जीवन शक्ति।#सूरज#सूर्य#सपना
आत्मिक शक्तितंत्र साधना से आत्मिक शक्ति कैसे बढ़ती है?तंत्र से आत्मिक शक्ति: ओज संचय (ब्रह्मचर्य + साधना → चेहरे पर तेज)। वाक् शक्ति (विशुद्धि चक्र जागृति)। संकल्प बल। निर्भयता (भय नाश)। अंतर्ज्ञान (आज्ञा चक्र)। कर्म क्षय। कुलार्णव: 'गुप्त साधक ही सिद्ध।' प्रदर्शन — शक्ति नष्ट।#आत्मिक शक्ति#ओज#तेज
ध्यान साधनाध्यान करने से आध्यात्मिक शक्ति कैसे बढ़ती है?ध्यान से प्राण-संचय, चित्त-शुद्धि और कुंडलिनी-जागरण के माध्यम से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। योगसूत्र (3/16-55) में संयम से सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। ब्रह्मचर्य + ध्यान = ओज-तेज। गीता (6/20-22) में ध्यान-फल इंद्रियातीत परम सुख बताया गया है।#ध्यान#आध्यात्मिक शक्ति#ओज