विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना से आत्मिक शक्ति वृद्धि का वर्णन कुलार्णव तंत्र और तंत्रालोक में है:
तंत्रालोक
शक्तिः साधनात् वर्धते।' — साधना से शक्ति बढ़ती है।
आत्मिक शक्ति वृद्धि के छह स्तर
1ओज संचय
ब्रह्मचर्य + तंत्र साधना = ओज। ओज = शरीर-मन दोनों की उच्चतम शक्ति। चेहरे पर 'तेज' प्रकट।
2वाक् शक्ति
नित्य जप → विशुद्धि चक्र जागृत → वाणी में शक्ति — जो बोलें, असर हो।
3संकल्प बल
नित्य साधना → नित्य संकल्प पूरा → संकल्प शक्ति बढ़ती है।
4निर्भयता
तंत्र में भय = अज्ञान। साधना से ज्ञान → भय नाश → परम आत्मशक्ति।
5अंतर्ज्ञान
tंत्रालोक: आज्ञा चक्र जागृत → 'दिव्य दृष्टि' — भविष्य और अदृश्य का बोध।
6कर्म क्षय
भागवत: नित्य जप-साधना से संचित कर्म क्षय → आत्मा हल्की और शक्तिशाली।
चेतावनी
कुलार्णव: 'गुप्त साधक ही सिद्ध होता है।' शक्ति का प्रदर्शन — शक्ति नष्ट।





