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आत्मिक शक्ति📜 कुलार्णव तंत्र, तंत्रालोक, महानिर्वाण तंत्र1 मिनट पठन

तंत्र साधना से आत्मिक शक्ति कैसे बढ़ती है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र से आत्मिक शक्ति: ओज संचय (ब्रह्मचर्य + साधना → चेहरे पर तेज)। वाक् शक्ति (विशुद्धि चक्र जागृति)। संकल्प बल। निर्भयता (भय नाश)। अंतर्ज्ञान (आज्ञा चक्र)। कर्म क्षय। कुलार्णव: 'गुप्त साधक ही सिद्ध।' प्रदर्शन — शक्ति नष्ट।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना से आत्मिक शक्ति वृद्धि का वर्णन कुलार्णव तंत्र और तंत्रालोक में है:

तंत्रालोक

शक्तिः साधनात् वर्धते।' — साधना से शक्ति बढ़ती है।

आत्मिक शक्ति वृद्धि के छह स्तर

1ओज संचय

ब्रह्मचर्य + तंत्र साधना = ओज। ओज = शरीर-मन दोनों की उच्चतम शक्ति। चेहरे पर 'तेज' प्रकट।

2वाक् शक्ति

नित्य जप → विशुद्धि चक्र जागृत → वाणी में शक्ति — जो बोलें, असर हो।

3संकल्प बल

नित्य साधना → नित्य संकल्प पूरा → संकल्प शक्ति बढ़ती है।

4निर्भयता

तंत्र में भय = अज्ञान। साधना से ज्ञान → भय नाश → परम आत्मशक्ति।

5अंतर्ज्ञान

tंत्रालोक: आज्ञा चक्र जागृत → 'दिव्य दृष्टि' — भविष्य और अदृश्य का बोध।

6कर्म क्षय

भागवत: नित्य जप-साधना से संचित कर्म क्षय → आत्मा हल्की और शक्तिशाली।

चेतावनी

कुलार्णव: 'गुप्त साधक ही सिद्ध होता है।' शक्ति का प्रदर्शन — शक्ति नष्ट।

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शास्त्रीय स्रोत
कुलार्णव तंत्र, तंत्रालोक, महानिर्वाण तंत्र
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