विस्तृत उत्तर
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के बीच मांधाता (शिवपुरी) द्वीप पर स्थित है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा है। इस द्वीप का आकार हिंदी के ॐ (ओंकार) अक्षर जैसा है, इसीलिए इसे ओंकारेश्वर कहते हैं।
शिव पुराण में इस ज्योतिर्लिंग की प्रमुख कथा राजा मांधाता से जुड़ी है। राजा मांधाता इक्ष्वाकु वंश के महान और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने इस पर्वत पर बहुत कठोर तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न किया। शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और ओंकारेश्वर नाम से यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में विराजित हो गए।
एक अन्य मान्यता के अनुसार देवताओं और दानवों के बीच युद्ध में देवताओं की सहायता के लिए शिव ने ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में यहाँ प्रकट होकर दानवों का दमन किया। यहाँ एक ही पर्वत पर दो ज्योतिर्लिंग हैं — ओंकारेश्वर और अमलेश्वर (ममलेश्वर)। नर्मदा नदी इस द्वीप की परिक्रमा करती है जो स्वयं एक पवित्र संयोग है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन से पाँच केदारों की यात्रा के समान फल मिलता है।





