विस्तृत उत्तर
शिव पुराण में ज्योतिर्लिंगों की संख्या के विषय में महत्वपूर्ण विवरण मिलता है।
शिव महापुराण के अनुसार भारत और नेपाल में कुल 64 मूल ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है। इनमें से 12 ज्योतिर्लिंग सर्वाधिक पवित्र और महत्वपूर्ण माने गए हैं, जिन्हें 'महाज्योतिर्लिंग' या 'द्वादश ज्योतिर्लिंग' कहा जाता है।
शिव पुराण की शतरुद्र संहिता (अध्याय 42) में इन 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम और स्थान इस प्रकार वर्णित हैं — सौराष्ट्र में सोमनाथ, श्रीशैल पर मल्लिकार्जुन, उज्जैन में महाकालेश्वर, मालवा में ओंकारेश्वर, देवघर में वैद्यनाथ, डाकिनी में भीमाशंकर, सेतुबंध पर रामेश्वर, दारुकावन में नागेश्वर, काशी में विश्वेश्वर (विश्वनाथ), गौतमी (गोदावरी) तट पर त्र्यंबकेश्वर, हिमालय में केदारनाथ और शिवालय में घुश्मेश्वर।
शिव पुराण में यह भी कहा गया है — 'एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति।' अर्थात जो मनुष्य प्रातः और सायंकाल इन 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम का पाठ करता है, उसके सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। शिव ज्योतिर्लिंग रूप में उन स्थानों पर विद्यमान हैं जहाँ वे स्वयं प्रकट हुए थे।




